सहारनपुर में ₹10 लाख की फर्जी लूट का भंडाफोड़, शिकायतकर्ता दीपक सैनी ही निकला मास्टरमाइंड
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पुलिस ने 17 अक्टूबर 2026 को ₹10 लाख की लूट की एक फर्जी घटना का पर्दाफाश किया। जाँच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया — जिस व्यक्ति ने लूट की शिकायत दर्ज कराई थी, वही इस पूरे नाटक का मास्टरमाइंड निकला। पुलिस ने कथित तौर पर लूटी गई ₹10.10 लाख की पूरी रकम शिकायतकर्ता की अपनी गाड़ी से ही बरामद कर ली।
घटनाक्रम: कैसे रची गई झूठी साजिश
यह मामला शनिवार सुबह करीब 11:20 बजे बेहट थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांडेवाड-रायपुर रोड पर एक देसी शराब की दुकान के पास का है। शिकायतकर्ता दीपक सैनी ने इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 पर सूचना दी कि चार हथियारबंद अज्ञात व्यक्तियों ने उनकी कार रोककर पथराव किया, बंदूक की नोक पर उनके साथ मारपीट की और ₹10.10 लाख लूटकर फरार हो गए।
सूचना मिलते ही बेहट थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुँची। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मयंक पाठक और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के अधिकारियों ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए जाँच शुरू की।
जाँच में सामने आई गड़बड़ियाँ
एसपी (ग्रामीण) मयंक पाठक के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ के दौरान ही शिकायत में कई विसंगतियाँ नज़र आईं, जिससे पुलिस को संदेह हुआ। जाँच को और गहरा करने पर पता चला कि दीपक सैनी एक निजी एटीएम सेवा चलाते थे और उनकी अपनी गाड़ी में ही वह पूरी रकम सुरक्षित रखी हुई थी जिसे वे लूटा हुआ बता रहे थे।
पूछताछ के दौरान सैनी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन पर करीब ₹10 लाख का कर्ज था। इस कर्ज से बचने के लिए उन्होंने झूठी लूट की कहानी गढ़ी और पुलिस को फर्जी इमरजेंसी कॉल कर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की।
पुलिस की कार्रवाई
गाड़ी से पूरी नकदी बरामद होने के बाद पुलिस ने दीपक सैनी के विरुद्ध फर्जी शिकायत दर्ज कराने और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों को गुमराह करने के आरोप में कार्रवाई की है। गौरतलब है कि झूठी पुलिस शिकायत दर्ज कराना भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश पुलिस द्रुत प्रतिक्रिया और तकनीक-आधारित जाँच तंत्र को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इस मामले ने यह भी रेखांकित किया कि फर्जी आपातकालीन कॉल किस तरह सीमित पुलिस संसाधनों को बेवजह उलझाती हैं।
आम जनता पर असर
फर्जी इमरजेंसी कॉल्स से न केवल वास्तविक पीड़ितों को समय पर मदद मिलने में बाधा आती है, बल्कि पुलिस बल और संसाधनों की भी बर्बादी होती है। बेहट क्षेत्र जैसे ग्रामीण इलाकों में, जहाँ पुलिस की उपलब्धता सीमित होती है, ऐसी घटनाएँ विशेष रूप से नुकसानदेह हो सकती हैं।
आगे क्या
पुलिस के अनुसार, दीपक सैनी के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है। बरामद ₹10.10 लाख को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है।