क्या 'शब्दोत्सव' कार्यक्रम के उद्घाटन से पहले कपिल मिश्रा ने जिहादी और नक्सली वैचारिक आतंकवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक का एलान किया?
सारांश
Key Takeaways
- ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ का उद्घाटन शुक्रवार को होगा।
- इसमें 100 से अधिक स्पीकर भाग लेंगे।
- 6 सांस्कृतिक कार्यक्रम और 2 कवि सम्मेलन आयोजित होंगे।
- कपिल मिश्रा ने जिहादी और नक्सली विचारधाराओं पर सर्जिकल स्ट्राइक का ऐलान किया।
- यह कार्यक्रम हर साल आयोजित किया जाएगा।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव ‘दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ के उद्घाटन से पहले एक साहसिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-विरोधी, देश-विरोधी और धर्म-विरोधी विचारधाराओं का विरोध करना आवश्यक है, और ऐसे कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में तीन दिन तक चलने वाला यह उत्सव शब्दोत्सव 2026 शुक्रवार से आरंभ होगा। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कपिल मिश्रा ने कहा, "दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में ‘शब्दोत्सव’ का आगाज़ हो रहा है। यह दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है और यह देश का सबसे बड़ा लिटरेचर फेस्टिवल है।"
कपिल मिश्रा ने बताया कि तीन दिन में 100 से अधिक स्पीकर इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान 6 सांस्कृतिक कार्यक्रम, दो बड़े कवि सम्मेलन और 40 से ज्यादा किताबों का विमोचन होगा। वे यह भी बताते हैं कि 40 से अधिक विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं और प्रोफेसर भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
उन्होंने उल्लेख किया कि सुनील आंबेकर, मनमोहन वैद्य और सच्चिदानंद जोशी जैसी प्रसिद्ध हस्तियां भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगी। सांस्कृतिक कलाकारों में ‘माधव बैंड’, ‘पांडव बैंड’ और हंसराज रघुवंशी शामिल होंगे। राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के प्रति प्रखर आवाज बनकर उभरने वाली प्रमुख हस्तियां इस उत्सव में हिस्सा लेंगी।
कपिल मिश्रा ने कहा, "मैं यह कहना चाहता हूं कि जो जिहादी और नक्सली वैचारिक आतंकवाद इस देश में फैलाने की कोशिश की गई थी, उन पर एक surgical strike इस लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से की जाएगी।"
उन्होंने कहा कि भारत में संस्कृति और साहित्य के नाम पर राष्ट्र-विरोधी, देश-विरोधी और धर्म-विरोधी विचारधाराओं को थोपने की कोशिशें की गई थीं। इनका प्रतिकार करने के लिए ‘शब्दोत्सव’ जैसे कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। दिल्ली में प्रतिवर्ष इसी तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।