क्या शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान से रोकना अन्याय है?
सारांश
Key Takeaways
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान से रोकना विवादास्पद है।
- प्रशासन का रवैया अन्यायपूर्ण माना जा रहा है।
- विशाल तिवारी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- स्वामी का आंदोलन गो रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- सरकार का दोहरा रवैया सवाल उठाता है।
पटना, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के गोलघर अखंड बासनी मंदिर से जुड़े विशाल तिवारी ने प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को गंगा स्नान से रोकने की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ पूर्णतः अन्याय हुआ है और उन्हें गंगा स्नान से रोकना बेहद गलत है।
विशाल तिवारी ने कहा कि सरकार के इशारे पर प्रशासन अविमुक्तेश्वरानंद को परेशान कर रहा है। प्रशासन अपनी गलती को छिपाने के लिए नोटिस भेज रहा है और यह तर्क दे रहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं हैं, जो पूरी तरह से असंगत और अपमानजनक है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में यह भी बताया कि कुंभ के समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य माना गया था और माघ मेले में जो आश्रम बना है, उसका आवंटन स्वयं मेला प्रशासन ने शंकराचार्य के नाम पर किया है। अब उनसे यह प्रमाण मांगा जाना हास्यास्पद है।
विशाल ने कहा कि यह कोई चुनावी पद नहीं है, जो पांच साल बाद कोई अन्य नेता आ जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य हैं और जिस पीठ की परंपरा के अनुसार उन्हें शंकराचार्य बनाया गया है, वे उसी पीठ के विधिवत शंकराचार्य हैं। जब तक वे किसी अन्य शिष्य को उत्तराधिकारी घोषित नहीं करते, तब तक वही शंकराचार्य बने रहेंगे। प्रशासन इस मामले में गंभीर भूल कर रहा है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को परेशान करने का कारण यह है कि वे देशभर में गो रक्षा के लिए गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन के चलते प्रशासन असहज है और सरकार के इशारे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को परेशान किया जा रहा है।
विशाल ने यह भी कहा कि चूंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरकार के पक्ष में बयान नहीं देते, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि जब चुनाव के समय वोट लेने की बात आती है, तब हिंदुत्व और सनातन समाज की दुहाई दी जाती है, लेकिन जब वही संत अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अहम भूमिका रही है।
विशाल ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित शंकराचार्य के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल सनातन परंपरा का अपमान है, बल्कि इससे धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।