श्री गोकुल गोदाम की पहल: पंचगव्य से बने हर्बल रंग और महिलाओं का रोजगार
सारांश
Key Takeaways
- प्राकृतिक रंगों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
- महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पहल आवश्यक है।
- सरकार द्वारा समर्थन मिलने से नए अवसर पैदा होते हैं।
- पंचगव्य आधारित उत्पादों का महत्व समझना चाहिए।
- हर गांव में SSG ग्रुप का गठन होना चाहिए।
उधमपुर, २३ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। श्री गोकुल गोदाम ने इस बार एक अनोखी और पर्यावरण-हितैषी होली मनाने की पहल की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि लोग हानिकारक रासायनिक रंगों के स्थान पर ऑर्गेनिक और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें। इसके साथ ही, यह पहल गांव की महिलाओं को रोजगार प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी काम कर रही है।
श्री गोकुल गोदाम जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में स्थित है। यहां की संचालिका अर्चना देवी और प्रशिक्षक मनोहर लाल शर्मा ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि गोदाम में रंग पंचगव्य के आधार पर प्राकृतिक विधियों से बनाए जाते हैं।
मनोहर लाल शर्मा ने बताया, "हमारे रंग पूरी तरह से सुरक्षित और रासायनिक-मुक्त हैं। इन रंगों को बनाने के लिए हम घरेलू और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करते हैं, जो फेस पैक के लिए भी उपयोगी होती हैं। ये रंग हल्दी, नीम के पत्तों का पाउडर, मुल्तानी मिट्टी, गुलाब की पंखुड़ियां, चंदन और अन्य कई प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन रंगों में किसी भी प्रकार का रासायनिक तत्व नहीं होता, इसलिए यह चेहरे या त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। "अक्सर लोग बाजार में मिलने वाले रंगों से डरते हैं कि कहीं इनके कारण चेहरा खराब न हो जाए, लेकिन इन प्राकृतिक रंगों से ऐसा कोई खतरा नहीं है। इसलिए इस बार हम होली को खुशी और हर्षोल्लास के साथ मना सकते हैं।"
उन्होंने बताया कि इस पहल का सबसे बड़ा लक्ष्य गांव की महिलाओं को रोजगार देना है। "यहां की महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार दिया जा रहा है ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।"
भारत सरकार इस तरह की पहलों का समर्थन कर रही है। पंचगव्य आधारित उत्पादों और त्योहारों से संबंधित चीज़ों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मनोहर लाल शर्मा ने बताया कि वे जम्मू-कश्मीर के हर हिस्से में ऐसे प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना चाहते हैं। यदि कोई SSG ग्रुप या माताएं-बहनें को-ऑपरेटिव ग्रुप बनाना चाहें, तो उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा। श्री गोकुल गोदाम भी इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
वहीं, अर्चना देवी ने कहा, "हम एसएसजी ग्रुप की महिलाएं हैं और इस बार भी प्राकृतिक रंग बना रही हैं। पिछले साल हमने कई रंग बनाए थे और लोगों को ये बहुत पसंद आए थे। इस साल हमें ५९ किलोग्राम का पहला ऑर्डर मिला है। हम और भी रंग तैयार कर रहे हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जाएगा।"
अर्चना ने बताया कि उनके साथ २०-२५ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। जरूरत पड़ने पर और महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, "लोग होली के रंग पसंद करते हैं, लेकिन चेहरे पर लगाने से डरते हैं, लेकिन हमारे रंग पूरी तरह सुरक्षित हैं। ये प्राकृतिक होने के कारण त्वचा के लिए भी फायदेमंद हैं।"
उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि हम औरतों से यह भी कहना चाहते हैं कि वे घर से निकलें और SSG ग्रुप से जुड़ें। इसमें अनेक अच्छी स्कीम्स हैं। हम चाहते हैं कि हर गांव, हर शहर में ऐसा कोई संगठन हो और औरतों को रोजगार मिले।