एचपीवी वैक्सीन: क्या यह पुरुषों के लिए भी आवश्यक है?
सारांश
Key Takeaways
- एचपीवी वैक्सीन पुरुषों के लिए भी आवश्यक है।
- यह वायरस दोनों लिंगों को प्रभावित कर सकता है।
- 9-14 वर्ष की उम्र में वैक्सीनेशन सबसे प्रभावी होता है।
- सही समय पर वैक्सीन की डोज लेना महत्वपूर्ण है।
- भारत में कई वैक्सीन विकल्प उपलब्ध हैं।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब एचपीवी वैक्सीन की बात होती है, तो आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर और महिलाओं का उल्लेख होता है। इस धारणा के चलते समाज में यह माना जाता है कि यह वैक्सीन केवल लड़कियों या महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन सच यह है कि एचपीवी, अर्थात् ह्यूमन पैपिलोमा वायरस, पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है और पुरुषों के लिए भी उतना ही खतरनाक हो सकता है।
डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, एचपीवी वैक्सीन केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी आवश्यक है।
एचपीवी एक सामान्य वायरस है, जिसके 200 से अधिक प्रकार होते हैं। यह मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है और यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को संक्रमित कर सकता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश मामलों में एचपीवी के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, जिससे व्यक्ति संक्रमित होने के बावजूद सामान्य महसूस कर सकता है और अनजाने में अपने साथी को संक्रमित कर सकता है।
डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि कई लोग यह सोचते हैं कि जब कोई परेशानी नहीं है, तो जांच या वैक्सीन की आवश्यकता नहीं है। लेकिन यही सोच भविष्य में बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है।
एचपीवी के विभिन्न स्ट्रेन्स विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न करते हैं। कुछ स्ट्रेन्स जेनाइटल वॉर्ट्स का कारण बनते हैं, जो जानलेवा नहीं होते, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से परेशानी देते हैं। वहीं, कुछ उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन्स, विशेषकर टाइप 16 और 18, कैंसर का कारण बनते हैं। जबकि ये स्ट्रेन्स महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, पुरुषों के लिए भी ये कम खतरनाक नहीं हैं। डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, पुरुषों में एचपीवी पेनाइल कैंसर, एनल कैंसर, ओरल और ओरोफैरिंजियल कैंसर का कारण बन सकता है।
इसलिए, एचपीवी वैक्सीन को केवल महिलाओं तक सीमित रखना एक बड़ी गलती है। डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि यदि पुरुष वैक्सीनेट नहीं होते हैं, तो वे न केवल अपने लिए जोखिम में रहते हैं, बल्कि अपने साथी के लिए भी खतरा बन सकते हैं। यदि पुरुषों को वैक्सीन लगती है, तो न केवल वे एचपीवी से होने वाली गंभीर बीमारियों से बचेंगे, बल्कि वायरस के फैलाव की कड़ी भी टूटेगी। यही कारण है कि कई देशों में एचपीवी वैक्सीन लड़कों और लड़कियों दोनों को दी जाती है।
अब सवाल यह है कि एचपीवी वैक्सीन लगवाने की सही उम्र क्या है। डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, इसकी सबसे उपयुक्त उम्र 9 से 14 वर्ष मानी जाती है। इस उम्र में सामान्यतः बच्चों की यौन गतिविधि शुरू नहीं होती और उनकी इम्युनिटी भी काफी मजबूत होती है। इसलिए वैक्सीन का प्रभाव सबसे बेहतर होता है और सुरक्षा लंबे समय तक मिलती है। हालांकि, यदि इस उम्र में वैक्सीन नहीं लग पाई है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह वैक्सीन 45 वर्ष की आयु तक लगाई जा सकती है, चाहे व्यक्ति पुरुष हो या महिला।
डोज की बात करें तो यह उम्र पर निर्भर करती है। यदि 9 से 14 वर्ष की उम्र में वैक्सीन लगाई जाती है, तो केवल दो डोज की आवश्यकता होती है। पहली डोज के छह महीने बाद दूसरी डोज दी जाती है। लेकिन यदि 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र में वैक्सीन शुरू की जाती है, तो तीन डोज लगती हैं। डॉ. मीरा पाठक बताती हैं कि सही समय पर पूरी डोज लेना बेहद महत्वपूर्ण है, तभी वैक्सीन पूरी तरह से प्रभावी होती है।
भारत में इस समय एचपीवी वैक्सीन के चार विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें सर्वारिक्स, गार्डासिल 4 और गार्डासिल 9 विदेशी वैक्सीन हैं, जबकि सर्वावैक भारत में निर्मित वैक्सीन है। ये वैक्सीन इस आधार पर भिन्न होती हैं कि वे कितने स्ट्रेन्स से सुरक्षा देती हैं। गार्डासिल 9 सबसे ज्यादा स्ट्रेन्स से बचाव करती है, जबकि सर्वावैक चार स्ट्रेन्स से सुरक्षा देती है और भारतीय होने के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत में उपलब्ध है। डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, वैक्सीन कौन-सी लगवानी है, यह डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करना चाहिए।
अक्सर लोग वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के बारे में चिंतित होते हैं, लेकिन डॉ. मीरा पाठक कहती हैं कि एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके साइड इफेक्ट्स सामान्य वैक्सीन के समान होते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन या लालिमा, और कभी-कभी हल्का बुखार। ये लक्षण कुछ ही समय में ठीक हो जाते हैं और किसी प्रकार का गंभीर खतरा नहीं होता।