क्या 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' भारत की संस्कृति और गौरव को नया आयाम देगा?: सीएम भूपेंद्र पटेल
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन 8 से 11 जनवरी को होगा।
- सीएम भूपेंद्र पटेल ने इस पर्व के महत्व पर जोर दिया है।
- यह कार्यक्रम भारत माता की संस्कृति और गौरव को प्रदर्शित करता है।
- सोमनाथ मंदिर का इतिहास और महत्व विदेशी आक्रांताओं के हमलों के बावजूद बना हुआ है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
गांधीनगर, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के प्रभास पाटन में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन हो रहा है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सोमनाथ मंदिर से संबंधित एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो के माध्यम से उन्होंने इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला।
सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा कि सोमनाथ मंदिर की कहानी विध्वंस की नहीं, बल्कि पिछले 1000 वर्षों से भारत माता के करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है। यह असत्य के सामने कभी न झुकने वाले भारत के गर्व का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 8 से 11 जनवरी तक 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत सनातन चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव मनाया जाएगा। यह एक ऐतिहासिक संकल्प का अवसर है, जिसका उद्देश्य भारत माता को वैभव के शिखर पर प्रतिष्ठित करना है।
वीडियो में सोमनाथ मंदिर की महानता, उसके महत्व और विदेशी आक्रांताओं के हमलों के बारे में जानकारी दी गई है। बताया गया है कि कैसे महमूद गजनवी, महमूद बेगड़ा और अलाउद्दीन खिलजी ने मंदिर और शिवलिंग को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया। फिर भी, यह मंदिर आज भी लाखों भारतीयों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
दरअसल, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाने के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर में सालभर कई कार्यक्रम होंगे। अधिकारियों ने बताया कि 8 से 11 जनवरी तक मंदिर परिसर में कई आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।
यह पर्व सदियों से चली आ रही राष्ट्रीय गौरव और सभ्यता की ताकत को प्रदर्शित करता है। इसका मुख्य विषय 'अटूट आस्था' है, जो भारत की स्थायी संस्कृति और भावना के प्रतीक के रूप में मंदिर के महत्व को उजागर करता है।