क्या सोमनाथ मंदिर से निकली यात्रा ने भक्तों का दिल जीत लिया?

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क्या सोमनाथ मंदिर से निकली यात्रा ने भक्तों का दिल जीत लिया?

सारांश

गुजरात के सोमनाथ मंदिर में 'स्वाभिमान पर्व' के तहत भव्य यात्रा आयोजित की गई, जिससे धार्मिक आस्था को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया गया। श्रद्धालुओं ने साधु-संतों का स्वागत किया और वातावरण भक्तिमय बना। जानिए इस अनोखे आयोजन के बारे में।

Key Takeaways

  • सोमनाथ मंदिर की यात्रा ने धार्मिक आस्था को मजबूती दी।
  • श्रद्धालुओं ने साधु-संतों का स्वागत किया।
  • प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से सोमनाथ का पर्यटन बढ़ा है।

सोमनाथ, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के सोमनाथ मंदिर में 'स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत शुक्रवार को शाम छह बजे साधु-संतों की एक भव्य यात्रा शुरू की गई। यह यात्रा सोमनाथ में पहली बार आयोजित की गई रेवड़ी यात्रा थी, जो महाशिवरात्रि और महाकुंभ मेले की परंपरागत यात्राओं के समान संपन्न हुई।

इस ऐतिहासिक यात्रा में दिगंबर साधुओं समेत एक बड़ी संख्या में साधु-संत शामिल हुए, जिसने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' को एक अद्भुत और दिव्य स्वरूप प्रदान किया।

यात्रा ने सोमनाथ नगरी के प्रमुख मार्गों से यात्रा की, जहां श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर साधु-संतों का स्वागत किया। हर ओर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि सोमनाथ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।

मुंबई से आए श्रद्धालु दिलीप ठाकुर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि सोमनाथ आकर उन्हें अत्यंत खुशी हो रही है और उन्होंने गर्व से कहा कि वे इस स्वाभिमान पर्व का हिस्सा बन पाए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के कारण अगले दिन कई रास्ते बंद रहने वाले हैं, इसलिए वे एक दिन पहले ही यहाँ पहुँच गए। उन्होंने मंदिर परिसर में उपलब्ध सुविधाओं और सुगम दर्शन व्यवस्था की भी सराहना की।

वहीं, श्रद्धालु श्वेता ठाकुर ने कहा कि यहाँ का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो गया है, हालाँकि उन्हें दुख है कि वे अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित मंदिर का स्वरूप नहीं देख सकीं। फिर भी, उन्होंने आयोजन और माहौल की प्रशंसा की।

सोमनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित ने कहा कि यह बताते हुए उन्हें अत्यंत आनंद हो रहा है कि सोमनाथ जी का भव्य और दिव्य स्वरूप आज जिस रूप में दिखाई देता है, वह प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की आस्था और एकता को अखंड बनाए रखने के लिए पूर्वजों ने जो बलिदान दिए थे, उन्हें एक हजार वर्ष पूरे हो चुके हैं और आज भी सोमनाथ लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि स्वाभिमान पर्व के आयोजन से सोमनाथ का माहौल पूरी तरह बदल गया है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से यहाँ पर्यटन और धार्मिक महत्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

गुजरात से आई एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि यहाँ के भव्य दृश्य शब्दों में बयान नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा, “निश्चित ही मोदी हैं तो मुमकिन है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। यहाँ आकर मैं खुद को धन्य महसूस कर रही हूँ।”

बरेली से आए श्रद्धालु शोभित अग्रवाल ने भी आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत किए गए प्रबंध और आयोजन सराहनीय हैं और जितनी तारीफ की जाए, कम है।

Point of View

बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता के प्रतीक के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

सोमनाथ मंदिर का महत्व क्या है?
सोमनाथ मंदिर हिंदुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जो आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
स्वाभिमान पर्व का आयोजन कब हुआ?
स्वाभिमान पर्व का आयोजन 9 जनवरी को हुआ।
इस यात्रा में कौन-कौन शामिल हुए?
इस यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हुए।
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