तेजस जेट की वायु शक्ति अभ्यास में भागीदारी पर अनिश्चितता बनी हुई है
सारांश
Key Takeaways
- तेजस जेट की तकनीकी समस्या से वायु शक्ति अभ्यास में भागीदारी पर संकट।
- 120 से अधिक एयरक्राफ्ट की भागीदारी, जिसमें प्रमुख फाइटर जेट शामिल हैं।
- वायुसेना की तैयारियों की उच्चतम स्तर पर निगरानी।
- अभ्यास को वास्तविक युद्ध स्थिति का स्वरूप देने के प्रयास।
- सुरक्षा तैयारियों में कोई कमी नहीं।
नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की सीमा के निकट भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट अपनी लक्ष्य साधने की क्षमताओं को और पुख्ता करने में लगे हुए हैं। वायु सैन्य अभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ के तहत 24 फरवरी को पोखरण फील्ड एंड फायरिंग रेंज में पूर्ण ड्रेस रिहर्सल का आयोजन किया जाएगा, जबकि 27 फरवरी को ‘वायु शक्ति’ का मुख्य कार्यक्रम होगा। लेकिन इस अभ्यास से पहले ही वायुसेना को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है।
‘वायु शक्ति’ में तेजस के शामिल होने को लेकर संशय उत्पन्न हो गया है। इसका कारण सभी तेजस जेट का तकनीकी खराबी के चलते ग्राउंडेड होना है और उनकी गहन जांच चल रही है।
गौरतलब है कि रविवार को मीडिया में तेजस विमान से संबंधित एक हादसे की सूचना आई थी। इसे क्रैश बताया जा रहा था, लेकिन तेजस का निर्माण करने वाली हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने सोमवार को एक बयान जारी कर इसे नकार दिया। एचएएल के अनुसार, तेजस जेट का क्रैश नहीं हुआ था, बल्कि यह एक छोटी तकनीकी गड़बड़ी थी जो जमीन पर हुई। एचएएल वायुसेना के साथ मिलकर इसके मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैंडर्डाइज्ड प्रोसीजर) के तहत विश्लेषण कर रही है।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, तेजस से पायलट का इजेक्शन भी नहीं हुआ था। वर्ष 2001 में पहली उड़ान भरने के बाद से तेजस ने 23 वर्षों तक बिना किसी हादसे के उड़ान भरी है। हालांकि, मार्च 2024 में जैसलमेर में आयोजित ‘भारत शक्ति’ त्रि-सेवा अभ्यास के दौरान पहला जेट क्रैश हुआ था। इसके बाद पिछले वर्ष नवंबर में दुबई एयरशो में भी एक तेजस जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।
‘वायु शक्ति’ अभ्यास में 120 से अधिक एयरक्राफ्ट शामिल हैं, जिनमें फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और अनेक अन्य एसेट्स शामिल हैं। वायुसेना के अनुसार, कुल 77 फाइटर जेट, 43 हेलिकॉप्टर और 8 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भाग लेने वाले थे। यदि तेजस भाग नहीं लेता है, तो एयरक्राफ्ट की संख्या में परिवर्तन संभव है।
फाइटर जेट श्रेणी में राफेल, सुखोई-30, मिराज 2000, मिग-29 और जगुआर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सी-130जे, सी-295, सी-17, चेतक, एएलएच एमके, एमआई-17, एलसीएच ‘प्रचंड’, अपाचे, चिनूक और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट का भी संचालन किया जाएगा।
इसके अलावा, शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशंस, आकाश, स्पाइडर और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स भी शामिल होंगे, जो दिन, शाम और रात के मिशनों का संचालन करेंगे। पहली बार ‘वायु शक्ति’ अभ्यास में सी-295 द्वारा नाइट असॉल्ट लैंडिंग ड्रिल का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस छोटे रनवे पर उतरकर गरुड़ कमांडो को युद्ध क्षेत्र में उतारने के बाद कम समय में दोबारा टेकऑफ करता नजर आएगा।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में शामिल भारतीय वायुसेना के एसेट अपने निशाने साधने और एयर डिफेंस तैयारियों को और मजबूत करेंगे। इस अभ्यास में वायुसेना के वेस्टर्न और साउथ वेस्टर्न कमांड के एयर बेस और एसेट भाग ले रहे हैं। पूरे अभ्यास को एक वास्तविक युद्ध क्षेत्र (रीयल वॉर जोन) का स्वरूप देकर अंजाम दिया जाएगा।
वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के माध्यम से पूरे अभ्यास की निगरानी और नियंत्रण किया जाएगा। पाकिस्तान की ओर से किसी भी नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अटैक और डिफेंस दोनों स्तरों पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम पूरे एयरस्पेस पर नजर रखेगा। एयर डिफेंस की कई परतें, जिनमें एंटी-एयरक्राफ्ट और एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल हैं, ऑपरेशनल रेडीनेस प्लेटफॉर्म के साथ तैयार रखी गई हैं।