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क्या तेजस्वी यादव के दावों का खुलासा ईसीआई के फैक्ट चेक में हुआ?

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क्या तेजस्वी यादव के दावों का खुलासा ईसीआई के फैक्ट चेक में हुआ?

सारांश

क्या तेजस्वी यादव के दावों की सच्चाई का पर्दाफाश हुआ? जानिए कैसे भारत निर्वाचन आयोग ने उनके आरोपों को गलत साबित किया। इस लेख में बिहार के विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान की सच्चाई और तेजस्वी यादव के दावों की तथ्यात्मक स्थिति का विवरण दिया गया है।

मुख्य बातें

तेजस्वी यादव के आरोपों की ईसीआई ने की पुष्टि नहीं।
राजद के दावों को भी ईसीआई ने भ्रामक बताया।
बिहार में मतदाता पुनरीक्षण अभियान की प्रक्रिया में पारदर्शिता आवश्यक है।

नई दिल्ली, 9 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ‘विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान 2025’ का संचालन किया जा रहा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कुछ तथ्यों के आधार पर इस अभियान पर प्रश्न उठाए। हालाँकि, तेजस्वी यादव के पोस्ट में किए गए दावों की फैक्ट चेक में पोल खुल गई है। ईसीआई के फैक्ट चेक में तेजस्वी यादव का दावा गलत साबित हुआ है।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने तेजस्वी यादव के बयान का फैक्ट चेक किया और बताया कि उनकी पोस्ट में किया गया दावा ‘भ्रामक’ है।

चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया, "राष्ट्रीय जनता दल ने स्वयं एसआईआर के काम के लिए 47,504 बूथ लेवल एजेंट्स अप्वॉइंट किए हैं, जो कि एसआईआर के लिए जमीनी स्तर पर तत्परता से कार्य कर रहे हैं। एसआईआर सुचारू रूप से चल रहा है, कुल 4 करोड़ (50 प्रतिशत) के करीब फॉर्म अभी तक कलेक्ट किए जा चुके हैं।"

तेजस्वी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 8 जुलाई को एक पोस्ट शेयर करते हुए ‘विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान’ पर सवाल उठाए थे।

तेजस्वी ने लिखा था, "लोकतंत्र की जननी बिहार में मतदाता अधिकारों का चीरहरण! बिहार में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान 2025’ में जो अव्यवस्था, अराजकता और असंवैधानिक कार्यप्रणाली सामने आ रही है, वह अत्यंत निंदनीय और लोकतंत्र के लिए घातक है। फर्जी फॉर्म, बिना दस्तावेज, बिना सत्यापन, सम्पूर्ण विवरणी के बिना ही फॉर्म भरने का मौखिक निर्देश, फर्जी हस्ताक्षर और निरक्षर बताकर किसी कर्मचारी से अंगूठा लगवाना, मतदाता की जानकारी के बिना डाटा अपलोड, बिना दस्तावेज फॉर्म भरने का मौखिक निर्देश, ईआरओ और बीएलओ पर 50 प्रतिशत फॉर्म आनन-फानन अपलोड करने का असंभव व अकल्पनीय दबाव, डाटा एंट्री ऑपरेटर तथा सुपरवाइजर से ही 10,000 फॉर्म प्रतिदिन अपलोड करने का अव्यावहारिक लक्ष्य, यह सब 10 जुलाई को माननीय सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले जल्दबाजी में किया जा रहा है, ताकि आंकड़ों की बाजीगरी से सच्चाई को ढका जा सके।"

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में कहा, "कहीं मौखिक रूप से कहा जा रहा है कि ‘आधार कार्ड ही काफी है’, तो कहीं कहा जा रहा है कि ‘किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं’- इससे मतदाताओं के बीच भारी भ्रम की स्थिति बन गई है। मैं खुद पार्टी कार्यकर्ताओं, बीएलओ और आम नागरिकों से बात कर रहा हूं। हर जगह अलग ही कहानी, अलग ही जालसाजी। ऐसा लग रहा है जैसे ‘फर्जीवाड़े का एक लाइव शो चल रहा है’, जिसमें हर दिन हर घंटे नई स्क्रिप्ट, नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। जब संसाधन नहीं, इंटरनेट नहीं, प्रशिक्षण नहीं, स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं, वांछित समय नहीं तो इतनी जल्दबाजी क्यों? क्या यह एक पूर्वनियोजित साजिश है, ताकि असल मतदाताओं को हटाकर चुनाव को प्रभावित किया जा सके? यह सिर्फ प्रक्रिया का अपमान नहीं है, यह मतदाता अधिकारों पर हमला है, लोकतंत्र के मूल में गड़बड़ी करने का कुत्सित प्रयास है। बिहार के लोकतंत्र को यूं अपवित्र नहीं होने देंगे। हम हर मंच पर, हर स्तर पर, हर मतदाता की आवाज बनेंगे। लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"

इसके अलावा, राजद ने एक क्लिप शेयर कर कथित वॉयस रिकॉर्डिंग सुनाई थी। राजद ने दावा किया था, "बिहार के एक जिलाधिकारी का मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण संबंधित दिशा-निर्देश अपनी विश्वसनीयता खो चुके चुनाव आयोग के मुंह पर करारा तमाचा है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले कैसे चुनाव आयोग के हाथ-पांव फूल गए हैं। क्या जिलाधिकारी का वॉइस सैंपल करा कर चुनाव आयोग फैक्ट चेक करेगा? यह बिहार है, बिहार! दो गुजराती बिहार नहीं चलाएंगे। फर्जीवाड़े के बहुत ऑडियो-वीडियो हैं। देखते जाइए।"

राजद का यह दावा भी ईसीआई के फैक्ट चेक में गलत निकला। ईसीआई ने बताया कि इस पोस्ट में किया गया दावा भ्रामक है। डीएम ने जो कहा है, वह एसआईआर में निहित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक आरोपों को गंभीरता से लेना आवश्यक है, लेकिन तथ्यात्मक साक्ष्यों के बिना किसी भी दावे का समर्थन करना उचित नहीं है। बिहार के निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखना लोकतंत्र की नींव है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव ने क्या आरोप लगाए थे?
तेजस्वी यादव ने बिहार में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान में अव्यवस्था और भ्रामक प्रथाओं का आरोप लगाया था।
ईसीआई ने तेजस्वी यादव के दावों का क्या जवाब दिया?
ईसीआई ने बताया कि तेजस्वी यादव के दावे भ्रामक हैं और उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्य सही नहीं हैं।
मतदाता पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य सही और सटीक मतदाता सूची तैयार करना और चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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