क्या थिरुवरूर भक्तवत्सलम को कला में योगदान के लिए पद्मश्री मिलना सपने के सच होने जैसा है?
सारांश
Key Takeaways
- थिरुवरूर भक्तवत्सलम को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
- उन्होंने 60 वर्षों तक मृदंगम बजाने का कार्य किया है।
- कला में विश्वास और मेहनत का महत्व बताया।
- पद्मश्री उनके लिए सपने के सच होने जैसा है।
- अन्य कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
चेन्नई, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की। गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार शामिल हैं। कला के क्षेत्र में योगदान के लिए तमिलनाडु के चेन्नई निवासी थिरुवरूर भक्तवत्सलम को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का ऐलान किया गया।
पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा के बाद थिरुवरूर भक्तवत्सलम ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "आज का दिन मेरी ज़िंदगी का एक अनमोल दिन है। पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा से ऐसा महसूस हो रहा है जैसे मेरे नाम का जिक्र दुनिया के महान लोगों में किया गया हो। मैंने पिछले 60 वर्षों से मृदंगम बजाने के अलावा और कुछ नहीं किया। यह दूसरी बार है जब भारत सरकार ने मुझे सम्मानित किया है। इससे पहले मुझे संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था। पद्मश्री के बाद मैं आगे के सभी बड़े पुरस्कार पाने की कामना करता हूं। यदि मैं इसी तरह मेहनत करता रहूं, तो मुझे एक दिन भारत रत्न मिलने की भी इच्छा है।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं इस पद्मश्री की घोषणा को अपने सपने के पूरे होने जैसा मानता हूं। पहले मैं केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का धन्यवाद करता हूं। मेरे प्रशंसकों और साथी कलाकारों के आशीर्वाद से ही मैं यहां तक पहुंचा हूं। इसमें मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।"
थिरुवरूर भक्तवत्सलम ने कहा कि अपने 60 वर्षों के संगीत सफर में मैंने कई कठिनाइयों का सामना किया है। इस क्षेत्र में आगे बढ़ने पर रुकावटें आती हैं। यह एक समुद्र की तरह है, जहां लहरें कभी नहीं रुकतीं। चाहे कितनी भी आलोचना हो, हमें अपने काम में लगे रहना चाहिए। हर कलाकार को कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन हमें निराश होकर बैठना नहीं चाहिए। मेहनत करते रहना और आगे बढ़ना चाहिए। यही संदेश मैं आने वाली पीढ़ी के कलाकारों को देना चाहता हूं।"
उन्होंने कहा कि भगवान में विश्वास रखना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे खास तरीके से निभा रहे हैं। काशी से अयोध्या तक इसके कई उदाहरण हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई अच्छे कार्य हो रहे हैं और लगातार हो रहे हैं। उन्होंने गांवों से लेकर कारीगरों तक, खिलौना बनाने वालों से लेकर बढ़ई तक, सभी के काम को देखा और उन्हें सम्मान दिया। इससे देश का विकास होगा। मेरे जैसे सामान्य कलाकारों को सम्मान मिलने से अन्य कलाकारों को भी प्रेरणा मिलती है।"
तिरुवारूर को एक पवित्र भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा जन्म वहां हुआ। यदि मुझे पुनर्जन्म मिलता है, तो भी मैं मृदंगम ही बजाना चाहूंगा। यह कला ही ऐसी है। 1970 के दशक में मैं तिरुवारूर से चेन्नई अपनी कला को निखारने के लिए आया था। उस समय अधिकांश कलाकार चेन्नई की ओर जा रहे थे। उन दिनों आज जैसी तकनीक नहीं थी, न मोबाइल फोन थे। सीखने के लिए केवल याद करके अभ्यास करना पड़ता था। टेप रिकॉर्डर भी नहीं थे। मैं रोज कई घंटों तक अभ्यास करता था।"
उन्होंने कहा, "जब भी मुझे कोई पुरस्कार मिलता है, तो लगता है कि मुझे और ज्यादा सावधान और अनुशासित होना चाहिए। अपने स्वभाव से लेकर अपने पेशे तक मैं सख्त अनुशासन का पालन करता हूं। यह पुरस्कार मुझे और ऊर्जा देगा। पद्मश्री निश्चित रूप से मेरे लिए प्रेरणा है। मेरा सपना है कि भारत रत्न मिलने तक मैं काम करता रहूं। इसके लिए मैं लगातार मेहनत करता रहूंगा।"