क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर टीएमसी की वर्चुअल बैठक अहम है?
सारांश
Key Takeaways
- टीएमसी ने एसआईआर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी है।
- बैठक में 126 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया।
- अभिषेक बनर्जी ने बैठक में सीईसी से सवाल किए।
कोलकाता, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर राजनीति तेज हो गई है। राज्य सरकार केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर लगातार आरोप लगा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। इसी बीच, अभिषेक बनर्जी ने एसआईआर के मुद्दे पर राज्य के नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक की।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीएमसी ने पूरे राज्य के नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता अभिषेक बनर्जी ने की। उन्होंने कहा कि अनियोजित एसआईआर के चलते अब तक 126 लोगों की जान जा चुकी है।
अभिषेक बनर्जी ने बताया कि टीएमसी ने एसआईआर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी है। हमारी 10 सदस्यीय प्रतिनिधि टीम ईसीआई से मिलने दिल्ली गई है। उन्होंने कहा कि बैठक में सीईसी ज्ञानेश कुमार उपस्थित थे, लेकिन हमारे सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।
उन्होंने आगे कहा कि 1.36 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगति पाई गई है। ऐसे लोग, जो देश और बंगाल के लिए नाम कमा रहे हैं, जैसे अमर्त्य सेन, मोहम्मद शमी, और नेताजी के परिवार के सदस्य भी इससे अछूते नहीं रहे।
अभिषेक ने बताया कि हमारे बीएलओ2 को सुनवाई में शामिल नहीं होने दिया गया। अन्य सभी पार्टियों ने व्हाट्सएप के आदेश मान लिए, लेकिन टीएमसी ने ऐसा नहीं किया। चुनाव व्हाट्सएप पर नहीं लड़े जाते। हमने विरोध किया और कहा कि बीएलओ2 सुनवाई में रहेगा, जिस पर ईसीआई के साथ काफी बहस हुई।
22 जनवरी को कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला, 2026 के उद्घाटन के अवसर पर भी ममता बनर्जी ने भारतीय चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया और मशहूर हस्तियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्तियों को जारी किए गए सुनवाई नोटिस के खिलाफ समाज के सभी वर्गों से एकजुट आंदोलन का आह्वान किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया चल रही है। कई लोगों की जान जा चुकी है। चुनाव आयोग को संशोधन प्रक्रिया के संचालन के तरीके से लोगों को होने वाली असुविधा को ध्यान में रखना चाहिए था। मसौदा मतदाता सूची पर आपत्तियों और दावों की सुनवाई के दौरान औसतन लोगों को चार से पांच घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है।