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त्रिपुरा के आदिवासी गांवों में सौर ऊर्जा का परिवर्तन: 'मन की बात' में मिली सराहना

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त्रिपुरा के आदिवासी गांवों में सौर ऊर्जा का परिवर्तन: 'मन की बात' में मिली सराहना

सारांश

त्रिपुरा के दूरदराज के आदिवासी गांवों में सौर ऊर्जा के फायदों को प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में सराहा। इसने न केवल बिजली की अनुपलब्धता को खत्म किया है, बल्कि शिक्षा और सामाजिक जीवन में भी सुधार किया है।

मुख्य बातें

सौर ऊर्जा ने त्रिपुरा के आदिवासी गांवों में जीवन को बदल दिया है।
पीएम सूर्य घर योजना के तहत मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है।
सौर मिनी-ग्रिड ने 12,103 परिवारों को लाभान्वित किया है।
किसान परिवारों के लिए सिंचाई पंपों की व्यवस्था की गई है।
सौर ऊर्जा ने सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में सुधार किया है।

अगरतला, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के प्रभावी परिवर्तन को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में राज्य की इन उपलब्धियों पर विशेष ध्यान दिया।

प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम के 132वें एपिसोड में 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' (पीएमएसजीएमबीवाई) की सफलता पर चर्चा करते हुए बताया कि सौर मिनी-ग्रिड पूर्वोत्तर के आदिवासी समुदायों में भरोसेमंद बिजली पहुँचाने में मदद कर रहे हैं, जिन्हें पहले बिजली की सुविधा नहीं मिल पाती थी।

त्रिपुरा में, विशेषकर रियांग आदिवासी समुदाय के गांवों में, सौर ऊर्जा ने दैनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। इससे बच्चों को सूर्यास्त के बाद पढ़ाई करने में सहायता मिली है, मोबाइल कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है और सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।

त्रिपुरा के बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने पश्चिम त्रिपुरा के मोहनपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय निवासियों के साथ इस कार्यक्रम को सुनने के बाद नई उपलब्धियों की जानकारी साझा की।

कृषि मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे मंत्री नाथ ने बताया कि सौर माइक्रोग्रिड दूरदराज के 'जनजाति' क्षेत्रों में एक नई आशा का संचार कर रहे हैं। खोवाई जिले के मुंगियाकामी ग्रामीण विकास खंड में कर्णराम पाड़ा इस बदलाव का एक मॉडल बन कर उभर रहा है।

मंत्री के अनुसार, त्रिपुरा के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित 347 दूरदराज इलाकों में सौर मिनी-ग्रिड के माध्यम से पहले ही 12,103 परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा चुकी है।

इसके अलावा, पीएमएसजीएमबीवाई योजना के तहत 2,753 परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सौर पैनल लगाए हैं। इसका लाभ सिर्फ परिवारों तक ही सीमित नहीं है; लगभग 7,991 किसान परिवारों को सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई पंप मिले हैं, जिससे लगभग 40,000 कनी (एक कनी लगभग 0.33 एकड़) भूमि की सिंचाई में मदद मिली है।

'प्रधानमंत्री देव-आईएनई' (पूर्वोत्तर के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल) के तहत 247 स्थानों पर 9,725 घरों को बिजली प्रदान की गई है। 'पीएम-जनमन' (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) पहल के अंतर्गत 30 स्थानों पर रहने वाले 1,703 परिवारों को सहायता दी गई है।

मंत्री नाथ ने कहा कि सौर ऊर्जा न केवल घरों को प्रकाशित कर रही है, बल्कि लोगों की आकांक्षाओं और आजीविका को भी नया आकार दे रही है।

उन्होंने त्रिपुरा की प्रगति को मान्यता देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया और इसे राज्य की आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

उन्होंने कहा कि अंधकार से प्रकाश की ओर, यह परिवर्तन सिर्फ विद्युतीकरण से कहीं अधिक एक नई शुरुआत है। त्रिपुरा एक उज्जवल, सौर ऊर्जा संचालित भविष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

त्रिपुरा में सौर ऊर्जा की सफलताएँ सिर्फ तकनीकी उपलब्धियाँ नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह न केवल बिजली की समस्या को हल कर रही है, बल्कि आदिवासी समुदायों के जीवन को भी सुधार रही है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में सौर ऊर्जा योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में भरोसेमंद बिजली पहुँचाना है।
सौर मिनी-ग्रिड का लाभ कितने परिवारों को मिला है?
सौर मिनी-ग्रिड के माध्यम से 12,103 परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है।
क्या इस योजना का लाभ किसान परिवारों को भी मिला है?
हां, लगभग 7,991 किसान परिवारों को सौर ऊर्जा से संचालित सिंचाई पंप प्राप्त हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना के बारे में कब बात की?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में इस योजना का जिक्र किया।
सौर ऊर्जा का सामाजिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है?
सौर ऊर्जा ने शिक्षा, मोबाइल कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार किया है।
राष्ट्र प्रेस
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