क्या यूजीसी ने धर्मशाला में छात्रा की मौत मामले की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई?
सारांश
Key Takeaways
- छात्रा की मृत्यु ने सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है।
- यूजीसी ने जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है।
- रैगिंग के आरोप गंभीर हैं।
- कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
- पीड़ित परिवार को न्याय की आवश्यकता है।
धर्मशाला, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने धर्मशाला के सरकारी कॉलेज की 19 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले पर गंभीरता से विचार किया है। यूजीसी ने छात्रा की मृत्यु के कारणों और इसमें शामिल व्यक्तियों पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।
26 दिसंबर को छात्रा की तबियत बिगड़ने के बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कुछ छात्राओं और एक प्रोफेसर ने उसकी रैगिंग की थी।
यूजीसी के अधिकारियों ने एक बयान में कहा, "हमने इस दुखद घटना का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। यूजीसी आश्वासन देता है कि दोषियों को सजा दी जाएगी और सख्त कदम उठाए जाएंगे। छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है।"
उसी कॉलेज के एक प्रोफेसर के खिलाफ छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है।
हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि यह मामला हमारे संज्ञान में आया है। मैंने इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का भेदभाव सहन नहीं किया जाएगा।
यह मामला विवादों में तब आया जब कॉलेज प्रशासन ने छात्रा को वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में छात्र मानने से इनकार कर दिया। पीड़ित के परिवार और अभिभावकों ने कॉलेज अधिकारियों और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
पीड़िता के पिता विक्रम कुमार की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, धर्मशाला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है, जो यौन उत्पीड़न, जानबूझकर चोट पहुंचाने और सामान्य इरादे से संबंधित है। एफआईआर में हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 भी शामिल है।