यूपी के 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान की गूंज ब्रिक्स देशों तक, 9 जुलाई को 37 करोड़ पौधे लगाकर बना विश्व रिकॉर्ड
सारांश
Key Takeaways
उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मिसाल कायम की है — 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' अभियान की चर्चा अब ब्रिक्स देशों के युवाओं तक जा पहुंची है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 9 जुलाई 2025 को एक ही दिन में 37 करोड़ से अधिक पौधे लगाकर उत्तर प्रदेश ने विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया। पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में कुल 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
वर्चुअल समिट में 9 देशों ने की सराहना
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित एक वर्चुअल समिट में 9 देशों के युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और उत्तर प्रदेश के इस अभियान की खुलकर प्रशंसा की। इस समिट में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथोपिया, ईरान और इंडोनेशिया के युवाओं ने पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागी युवाओं का मानना था कि 'एक पेड़ मां के नाम' जैसा विचार लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ता है — और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
बागपत के अमन कुमार ने बुलंद की भारत की आवाज़
बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि वर्चुअल समिट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व बागपत के युवा अमन कुमार ने किया। अमन ने पर्यावरण के लिए स्वयंसेवा का संदेश देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से जूझती दुनिया में हर नागरिक को प्रकृति संरक्षण का हिस्सा बनना होगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही अमन कुमार को प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित कर चुके हैं। अमन का कहना है कि सीएम योगी के नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण के लिए जितने कार्य किए जा रहे हैं, उतने पहले कभी नहीं हुए।
भावनात्मक जुड़ाव ही इस अभियान की असली शक्ति
जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, जब किसी अभियान में भावनात्मक जुड़ाव होता है, तभी वह दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ता है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को केवल एक सामान्य पौधरोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि विभिन्न देशों के युवाओं ने इसे अपने-अपने देशों में लागू करने की इच्छा जताई। प्रतिभागियों का स्पष्ट मत था कि पर्यावरण बचाने के लिए केवल नारे नहीं, बल्कि ऐसे अभियान चाहिए जो समाज की भावनाओं को छू सकें।
विकास और पर्यावरण साथ-साथ — यूपी का संदेश
जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के बीच उत्तर प्रदेश का यह मॉडल दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं। ब्रिक्स देशों के युवाओं की सराहना ने इस अभियान को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। यह पहल आने वाले समय में अन्य देशों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर सकती है।