क्या उत्तराखंड में माल्टा फ्रूट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिशन शुरू किया जाएगा? : सीएम पुष्कर सिंह धामी
सारांश
Key Takeaways
- उत्तराखंड में माल्टा महोत्सव का आयोजन किया गया है।
- माल्टा मिशन के तहत राज्य में उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
- किसानों को नए बाजारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
- सरकार द्वारा विभिन्न अनुदान योजनाएं चलाई जा रही हैं।
- युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
देहरादून, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजकीय उद्यान सर्किट हाउस गढ़ीकैंट में 'उत्तराखंड माल्टा महोत्सव' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य में माल्टा फल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए माल्टा मिशन की शुरुआत करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी राज्य की ओर से माल्टा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी पत्नी गीता पुष्कर धामी के साथ विभिन्न जनपदों के माल्टा एवं नींबू प्रजाति के फलों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फलों से बने विभिन्न उत्पादों का स्वाद लिया।
सीएम ने कहा कि माल्टा उत्तराखंड की पहचान और परंपरा से जुड़ा हुआ है। राज्य की आर्थिकी और समृद्धि को सशक्त बनाने में बागवानी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। इन्हीं संभावनाओं को साकार करने के लिए राज्य सरकार ने एप्पल मिशन और कीवी मिशन जैसी कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है। इसी तर्ज पर राज्य में माल्टा मिशन की भी शुरुआत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य के माल्टा की ब्रांडिंग और इसे बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य के प्रत्येक जनपद में माल्टा महोत्सव का आयोजन इन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य के माल्टा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए दिल्ली में भी माल्टा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की आर्थिकी को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। खेती और बागवानी के क्षेत्र में उचित प्रोत्साहन, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाई जा रही है। यह पहल पलायन को रोकने और युवाओं को अपने गांव के निकट रोजगार देने में गेम चेंजर साबित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में माल्टा, सेब, नाशपाती, कीवी, अखरोट, आड़ू और नींबू वर्गीय फलों के बागान स्थापित करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। फसल आधारित क्लस्टर विकसित कर उत्पादन और विपणन को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राज्य में माल्टा और गलगल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। सरकार द्वारा बागान लगाने पर 50 प्रतिशत अनुदान, सूक्ष्म सिंचाई पर 70 से 80 प्रतिशत अनुदान और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों पर 60 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने माल्टा महोत्सव में प्रतिभाग करने आए पौड़ी गढ़वाल के माल्टा उत्पादक हरीश के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने 53 प्रजातियों के लगभग एक हजार पौधे रोपित किए हैं और इस बार भी 200 पौधे रोपित करने की योजना बना रहे हैं।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि माल्टा जैसे स्थानीय फलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने से किसानों को सीधा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के महोत्सव किसानों को नए बाजारों से जोड़ने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले पांच वर्षों में उत्तराखंड औद्यानिकी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास है कि माल्टा जैसे स्थानीय फलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को प्रोत्साहित कर इसका सीधा लाभ प्रदेश के किसान भाइयों तक पहुंचाया जाए और यह महोत्सव इन्हीं प्रयासों का सशक्त प्रमाण है।