क्या भारतीय सेना के सिम्फनी बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ को संगीतमय श्रद्धांजलि दी?

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क्या भारतीय सेना के सिम्फनी बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ को संगीतमय श्रद्धांजलि दी?

सारांश

भारतीय सेना ने ‘वंदे मातरम्’ को 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की है। यह प्रस्तुति देशभर में आयोजित समारोहों का हिस्सा है, जिसमें सेना ने सैन्य बैंड के माध्यम से देशभक्ति और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया।

Key Takeaways

  • ‘वंदे मातरम्’ का 150 वर्ष का उत्सव
  • भारतीय सेना की संगीतमय श्रद्धांजलि
  • राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
  • देशभक्ति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पूरे देश में समारोहों की एक श्रृंखला का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय सेना भी इस विशेष दिन पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। सेना 19 जनवरी से 26 जनवरी तक देश के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर सैन्य बैंड की प्रस्तुतियों का आयोजन कर रही है।

इसी क्रम में मंगलवार को भारतीय सेना के सिम्फनी बैंड ने नई दिल्ली के सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस में एक अद्वितीय संगीतमय प्रस्तुति दी। इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी के बीच उपस्थित दर्शकों को सैन्य धुनों ने समर्पित कर दिया। यह प्रस्तुति विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ को समर्पित थी।

यह ध्यान देने योग्य है कि वंदे मातरम् ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा का कार्य किया था। आज यह राष्ट्रीय एकता, गौरव और सांस्कृतिक विरासत का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है। सावधानीपूर्वक चयनित संगीत रचनाओं के माध्यम से भारतीय सेना सिम्फनी बैंड ने इस ऐतिहासिक गीत की अमर विरासत और उसकी सतत प्रासंगिकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

यह कार्यक्रम, जो नई दिल्ली के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में से एक सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस में आयोजित हुआ, भारतीय सेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत वह देश की समृद्ध देशभक्ति और संगीत परंपराओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास करती है। यहां उपस्थित नागरिकों और आगंतुकों ने इस भावपूर्ण संगीतमय श्रद्धांजलि का साक्षी बनकर देश के सांस्कृतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण पड़ाव का उत्सव मनाया।

इसके साथ ही ‘वंदे मातरम्’ की चिरस्थायी भावना को पुनः आत्मसात किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य राष्ट्रगीत के भावनात्मक और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करना और देशवासियों में देशभक्ति और एकता की भावना को और मजबूत करना है। भारतीय सेना ने राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न सैन्य कमांड क्षेत्रों और प्रमुख शहरों के ऐतिहासिक स्थलों पर सैन्य बैंड डिस्प्ले की योजना बनाई है। इस प्रकार की प्रस्तुतियों में बिहार के पटना और गयाजी, झारखंड के रांची, उत्तर प्रदेश के लखनऊ और प्रयागराज में सैन्य बैंड की धुनें लोगों को देशभक्ति का संदेश देंगी।

इसके अलावा, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, छत्तीसगढ़ के रायपुर, ओडिशा के गोपालपुर, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी सैन्य बैंड द्वारा देशभक्ति की धुनें प्रस्तुत की जाएंगी। इसके साथ ही, महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे, तेलंगाना के हैदराबाद, हिमाचल प्रदेश के शिमला, और लद्दाख के कारगिल में भी इस प्रकार के प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

Point of View

बल्कि यह हमारे राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक है। ऐसे कार्यक्रमों से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

‘वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
‘वंदे मातरम्’ ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण प्रेरणा प्रदान की थी और आज भी यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
भारतीय सेना का सिम्फनी बैंड कब और कहां प्रदर्शन कर रहा है?
भारतीय सेना का सिम्फनी बैंड 19 जनवरी से 26 जनवरी तक विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर सैन्य बैंड की प्रस्तुतियां दे रहा है।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से स्थान शामिल हैं?
इस कार्यक्रम में पटना, रांची, लखनऊ, प्रयागराज, देहरादून, रायपुर, गोपालपुर, बेंगलुरु, जबलपुर, मुंबई और पुणे शामिल हैं।
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