कृष्णा जल विवाद: 13 अक्टूबर को नायडू से मिलेंगे तमिलनाडु CM विजय, 9.749 TMC की कमी पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 13 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा पहुँचकर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से कृष्णा नदी जल आपूर्ति में भारी कमी, तमिलनाडु से गुज़रने वाली नदियों पर प्रस्तावित बांधों और नदी अंतर्संबंध परियोजनाओं पर बातचीत कर सकते हैं। यह प्रस्तावित बैठक ऐसे समय में हो रही है जब तेलुगु गंगा परियोजना के तहत निर्धारित वार्षिक आवंटन का तमिलनाडु को अब तक पाँचवाँ हिस्सा भी नहीं मिला है।
जल की कमी: मुख्य विवाद बिंदु
समझौते के तहत आंध्र प्रदेश को अंतरराज्यीय सीमा पर प्रतिवर्ष 12,000 मिलियन घन फीट (12 टीएमसी) कृष्णा नदी जल उपलब्ध कराना अनिवार्य है। आँकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 तक तमिलनाडु को केवल 2.251 टीएमसी ही प्राप्त हुआ था — यानी बकाया राशि 9.749 टीएमसी के करीब है। गौरतलब है कि वार्षिक आवंटन और अब तक प्राप्त राशि अलग-अलग अवधियों के लिए हैं, इसलिए इस अंतर की व्याख्या सावधानी से की जानी चाहिए।
यह अंतर बातचीत में केंद्रीय मुद्दा बनने की संभावना है। विजय की विजयवाड़ा यात्रा से दोनों सरकारों को जल निकासी की समीक्षा करने और वर्ष के शेष महीनों में तमिलनाडु की ज़रूरतों पर विचार करने का अवसर मिलेगा।
प्रस्तावित बांध और नदी अंतर्संबंध पर चिंताएँ
कृष्णा जल आपूर्ति के अतिरिक्त विजय द्वारा तमिलनाडु से होकर बहने वाली नदियों पर आंध्र प्रदेश के बांध निर्माण प्रस्तावों का मुद्दा भी उठाए जाने की संभावना है। खबरों के अनुसार, तमिलनाडु को आशंका है कि ये ढाँचे निचले राज्य तक पहुँचने वाले प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
नदी अंतर्संबंध परियोजनाओं पर परामर्श और प्रस्तावित संरचनाओं को लेकर तमिलनाडु की आपत्तियाँ भी एजेंडे में शामिल होने की उम्मीद है। मौजूदा जल बंटवारे की व्यवस्थाओं और दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदियों से जुड़े प्रस्तावों पर भी विस्तार से बातचीत होगी।
पवन कल्याण से भी होगी मुलाकात
रिपोर्टों के अनुसार, विजय इस दौरे में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे। ये बैठकें जल संबंधी उन मुद्दों पर केंद्रित रहेंगी जो दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद का कारण बने हुए हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के राज्यों के बीच अंतरराज्यीय जल विवाद तेज़ होते जा रहे हैं — कावेरी विवाद इसकी ताज़ा मिसाल है। तेलुगु गंगा परियोजना दशकों पुरानी है, लेकिन समझौते के तहत निर्धारित जल आपूर्ति को लेकर असहमति नियमित रूप से उभरती रही है।
13 अक्टूबर की वार्ता के किसी भी निर्णय या प्रतिबद्धता का ब्यौरा बैठक के परिणाम पर निर्भर करेगा। इस यात्रा पर दोनों राज्यों की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि जल आवंटन का मुद्दा जनजीवन और कृषि दोनों से जुड़ा है।