विश्व आवास दिवस के 40 वर्ष: यूएन-ईएससीएपी ने गिनाए आदर्श शहर के 6 मुख्य मानक
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएन-ईएससीएपी ने विश्व आवास दिवस 2026 के अवसर पर स्पष्ट किया कि एक आदर्श और टिकाऊ शहर कैसा दिखना चाहिए — और इसके लिए 6 ठोस मानक सामने रखे। 5 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा यह दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि पहली बार 1986 में आयोजित इस वैश्विक अवसर की यह 40वीं वर्षगाँठ है। इस वर्ष का केंद्रीय आयोजन मस्कट, ओमान में होगा।
विश्व आवास दिवस की पृष्ठभूमि
हर वर्ष अक्टूबर के पहले सोमवार को मनाए जाने वाले इस दिवस की शुरुआत 1986 में हुई थी। तब से यह दिन वैश्विक स्तर पर आवास से जुड़ी चुनौतियों और शहरी जीवन की गुणवत्ता पर विचार-विमर्श के लिए प्रमुख मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। 40 वर्षों के इस सफर में शहरीकरण की रफ्तार, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसी चुनौतियाँ और अधिक जटिल हुई हैं।
ईएससीएपी के 6 मानक: आदर्श शहर की पहचान
यूएन-ईएससीएपी (एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में यह सवाल उठाया कि मज़बूत और लचीले शहर असल ज़िंदगी में कैसे दिखते हैं — केवल सिद्धांत में नहीं। इसके उत्तर में उसने 6 मुख्य बिंदु प्रस्तुत किए।
पहला: आवश्यक सुविधाएँ घर के समीप हों। काम, दुकानें, विद्यालय और पार्क पैदल या साइकिल की दूरी पर उपलब्ध होने से समय की बचत होती है और यातायात व प्रदूषण में कमी आती है। ईएससीएपी स्थानीय सरकारों को ऐसे सघन और सुविधासंपन्न इलाके विकसित करने में सहयोग कर रहा है।
दूसरा: प्रकृति को शहरी ढाँचे का अभिन्न अंग बनाया जाए। पार्क, हरित उद्यान और वृक्ष केवल सौंदर्य के साधन नहीं हैं — ये अत्यधिक गर्मी और भारी वर्षा जैसी आपदाओं से शहर की रक्षा करते हैं। ईएससीएपी शहरी नियोजन में प्रकृति-आधारित समाधानों को अपनाने की पैरवी करता है।
तीसरा: घर सुरक्षित और किफायती हों। किफायती आवास यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल, बिजली और पर्याप्त रहने की जगह मिले। संगठन कमज़ोर वर्गों के लिए सस्ते आवास की वकालत करता है।
चौथा: प्रौद्योगिकी का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुँचे। स्मार्ट टेक्नोलॉजी बाढ़ की अग्रिम चेतावनी, डिजिटल सार्वजनिक सेवाएँ और संसाधन प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकती है। ईएससीएपी शहरी प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल उपकरणों को प्रोत्साहित कर रहा है।
पाँचवाँ: आवागमन सभी के लिए सुगम हो। फुटपाथ और सार्वजनिक परिवहन बुज़ुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह सुलभ होने चाहिए। ईएससीएपी शहरी परिवहन की पहुँच को विस्तृत करने में सहयोग करता है ताकि सेवाएँ भरोसेमंद और सुरक्षित बनें।
छठा: समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। स्थानीय नागरिकों को शहरी नियोजन और निर्णय-प्रक्रिया में शामिल करना ज़रूरी है। ईएससीएपी का मानना है कि शहर तभी बेहतर काम करते हैं, जब वे सभी के लिए काम करते हैं।
भारत में प्रतिक्रियाएँ
भारत में भी विश्व आवास दिवस की गूँज सुनाई दी। मणिपुर सरकार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रदेश के नागरिकों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह अवसर सुरक्षित, समावेशी, मज़बूत और टिकाऊ समुदाय निर्मित करने की साझा ज़िम्मेदारी का स्मरण कराता है।
दिल्ली सरकार के मंत्री मनिंदर सिंह सिरसा ने भी एक्स पर लिखा, 'हर इंसान ऐसी जगह का हकदार है जिसे वह गर्व से अपना घर कह सके — एक ऐसी जगह जो सुरक्षित हो, सबको साथ लेकर चलने वाली हो और जहाँ आगे बढ़ने के मौके हों।' उन्होंने टिकाऊ और समावेशी शहर बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावास का संदेश
संयुक्त राष्ट्र पर्यावास (UN-Habitat) ने भी इस अवसर पर पोस्ट कर कहा कि 40 वर्षों से यह दिवस वैश्विक स्तर पर आवास-संबंधी चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रमुख मंच रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में तेज़ शहरीकरण, जलवायु संकट और आवास की किफायत को लेकर दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दशकों में शहरी नीति-निर्माण की दिशा तय करने में इस तरह के वैश्विक मंच अहम भूमिका निभाते रहेंगे।