बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड में संकट, तीन निदेशकों ने दिया इस्तीफा
सारांश
Key Takeaways
- तीन निदेशकों ने इस्तीफा दिया, जिससे बीसीबी की स्थिरता पर सवाल उठे।
- इस्तीफों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।
- बोर्ड में आंतरिक असंतोष का संकेत है।
- सरकार चुनावों की जांच कर रही है।
- खेल मंत्री ने नई कमेटी बनाने का संकेत दिया।
ढाका, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शनिवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की एक महत्वपूर्ण बैठक ढाका में आयोजित की गई। इस बैठक के बाद बीसीबी को एक बड़ा झटका लगा, जब तीन निदेशकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले निदेशकों में फैयाजुर रहमान, शानियान तनीम और मेहराब आलम चौधरी शामिल हैं। बीसीबी में हाल ही में हुए चुनाव के छह महीने से भी कम समय में इस्तीफा देने वाले निदेशकों की संख्या अब छह हो गई है, जो एक चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
इससे पहले जनवरी में इश्तियाक सादिक ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। उसी महीने, अमजद हुसैन को मीडिया अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने भी इस्तीफा सौंपा। इसके बाद, गुरुवार को सरकार द्वारा नामित निदेशक यासिर मोहम्मद फैसल ने भी अपना पद छोड़ा। शनिवार को हुए तीन इस्तीफों ने इस स्थिति को और भी गंभीर कर दिया है।
बीसीबी अध्यक्ष अमिनुल इस्लाम की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि क्या ऐसा हुआ कि तीन निदेशक इस्तीफा देने के लिए मजबूर हुए। नए मीडिया विभाग के अध्यक्ष मोहम्मद मोक्सेडुल कमाल ने बताया कि उन्हें भी फैयाजुर के इस्तीफे की जानकारी मीडिया के माध्यम से ही मिली।
उन्होंने कहा कि बोर्ड में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई, और इस्तीफा देने वालों ने अपने फैसले को व्यक्तिगत कारणों से जोड़ा है। हाल ही में, फैयाजुर ने ढाका लीग के संचालन में बीसीबी की कथित निष्क्रियता की आलोचना की थी, जो आंतरिक असंतोष को दर्शाता है।
लगातार इस्तीफों के बीच बीसीबी का माहौल पहले से ही दबाव में है। पिछले साल अक्टूबर में हुए चुनावों की जांच की जा रही है, और रिपोर्ट जल्द ही खेल मंत्रालय को सौंपी जा सकती है। खेल मंत्री अमिनुल हक ने यह भी संकेत दिया कि एक अलग कमेटी गठित की जा सकती है, जो यह जांच करेगी कि बांग्लादेश टीम ने हाल ही में हुए टी20 विश्व कप में हिस्सा क्यों नहीं लिया।
निरंतर हो रहे इस्तीफों और बढ़ती जांच प्रक्रियाएं बीसीबी के भीतर अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं।