क्या चेतेश्वर पुजारा ने टी20 के दौर में टेस्ट क्रिकेट के प्रति समर्पण से अलग पहचान बनाई?

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क्या चेतेश्वर पुजारा ने टी20 के दौर में टेस्ट क्रिकेट के प्रति समर्पण से अलग पहचान बनाई?

सारांश

चेतेश्वर पुजारा की कहानी संघर्ष और धैर्य की है। टेस्ट क्रिकेट के इस फटाफट दौर में, उन्होंने अपनी अनूठी बल्लेबाजी से न सिर्फ सफलता पाई, बल्कि एक नई पहचान भी बनाई। आइए, जानते हैं उनके सफर के बारे में।

मुख्य बातें

पुजारा का धैर्य और समर्पण उन्हें क्रिकेट में एक अलग पहचान दिलाता है।
टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान भारतीय क्रिकेट के लिए अमूल्य है।
पुजारा ने काउंटी क्रिकेट में भी सफलताएँ हासिल की हैं।
उनकी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से कई ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई हैं।
पुजारा का करियर हमें संघर्ष और सफलता का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।

नई दिल्ली, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। युग के प्रवाह के खिलाफ चलना कभी आसान नहीं होता। आप अक्सर अकेले होते हैं और सफलता की दिशा में अपने संघर्ष को खुद ही पहचानना होता है। चेतेश्वर पुजारा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

फटाफट क्रिकेट के इस युग में अपनी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी के साथ, पुजारा ने न केवल टेस्ट क्रिकेट में अद्भुत सफलता हासिल की, बल्कि एक दशक तक भारत की इस फॉर्मेट में सबसे मजबूत कड़ी बने रहे। उन्हें उनकी मजबूत मानसिकता और क्रीज पर समय बिताने की क्षमता के कारण राहुल द्रविड़ के बाद दूसरा 'द वॉल' कहा जाता है।

25 जनवरी 1988 को गुजरात के राजकोट में जन्मे चेतेश्वर पुजारा को क्रिकेटर बनाने में उनके पिता अरविंद पुजारा का सबसे बड़ा योगदान रहा। अरविंद स्वयं भी एक प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और कोच रह चुके हैं। देश के लिए खेलने की उनकी इच्छा कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन अपने बेटे के माध्यम से उन्होंने इस सपने को पूरा होते देखा।

बचपन से क्रिकेट के प्रति समर्पित पुजारा ने सौराष्ट्र की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेला। सौराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी में 2005 में उन्होंने डेब्यू किया। 5 साल तक घरेलू क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद पुजारा को 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की तरफ से टेस्ट में डेब्यू का अवसर मिला। यह वह समय था जब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज अपने करियर के अंतिम चरण में थे। भारत को इन दोनों के विकल्प की तलाश थी। पुजारा ने मजबूती से अपनी जगह बनाई और धीरे-धीरे टेस्ट टीम के नियमित और भरोसेमंद सदस्य बन गए।

2010 से 2023 के बीच, पुजारा ने देश और विदेश में भारतीय टीम को टेस्ट फॉर्मेट में महत्वपूर्ण सफलता दिलाने में बड़ा योगदान दिया। 2018-19 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज में की गई प्रदर्शन को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने चार टेस्ट मैचों में 521 रन बनाए और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण को नियंत्रित किया। इस प्रदर्शन ने भारत की पहली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नवंबर 2012 में अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ 206 रन की पारी, दिसंबर 2013 में जोहानसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 153 रन, 2017 में रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 525 गेंदों पर खेली गई 202 रन की पारी, दिसंबर 2018 में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 123 और 71 रन की पारी, और 2021 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में 77 और ब्रिसबेन में 56 रन की पारी पुजारा के करियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में मानी जाती हैं।

पुजारा ने अपने करियर में 103 टेस्ट मैचों की 176 पारियों में 19 शतक और 35 अर्धशतक की मदद से 7,195 रन बनाए। उनका औसत 43.60 रहा और उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 206 रन रहा। पुजारा ने काउंटी क्रिकेट में भी बड़ी सफलता हासिल की।

24 अगस्त 2025 को पुजारा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। टी20 क्रिकेट के दौर में टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नए खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने। उनके संघर्ष और सफलता की कहानी हमें लगातार प्रेरित करती रहेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेतेश्वर पुजारा का जन्म कब हुआ था?
चेतेश्वर पुजारा का जन्म 25 जनवरी 1988 को गुजरात के राजकोट में हुआ था।
पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट में कब डेब्यू किया?
पुजारा ने 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया।
पुजारा के करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी कौन सी थी?
पुजारा की सर्वश्रेष्ठ पारी 206 रन की थी, जो उन्होंने नवंबर 2012 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली थी।
पुजारा ने कितने टेस्ट मैच खेले हैं?
पुजारा ने अपने करियर में कुल 103 टेस्ट मैच खेले हैं।
पुजारा ने कब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा?
पुजारा ने 24 अगस्त 2025 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा।
राष्ट्र प्रेस