5 अक्टूबर 2026
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वैभव सूर्यवंशी को मौके का इंतजार करना होगा: गौतम गंभीर ने बताई ड्रेसिंग रूम की नीति

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वैभव सूर्यवंशी को मौके का इंतजार करना होगा: गौतम गंभीर ने बताई ड्रेसिंग रूम की नीति

सारांश

गौतम गंभीर ने साफ कहा — फॉर्म काफी नहीं है। वैभव सूर्यवंशी जैसी असाधारण प्रतिभा को भी अनुभवी खिलाड़ियों की कतार में अपनी बारी का इंतजार करना होगा। भारतीय कोच की यह नीति युवा जोश और टीम स्थिरता के बीच नाजुक संतुलन की कहानी है।

मुख्य बातें

गौतम गंभीर ने 5 अक्टूबर 2026 को बताया कि उन्होंने वैभव सूर्यवंशी से बात कर उन्हें मौके का इंतजार करने को कहा है।
वैभव ने जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ 15 साल और 99 दिन की उम्र में टी20 डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा।
गंभीर ने अभिषेक और संजू सैमसन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ बातचीत को 'मुश्किल' बताया।
एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में 9 गेंदों पर 15 रन के बावजूद भारत ने पाकिस्तान को हराकर गोल्ड जीता।
15 साल, 6 महीने और 6 दिन की आयु में वैभव एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाले सबसे युवा भारतीय बने, सौरभ चौधरी का रिकॉर्ड तोड़ा।

भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने 5 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि उन्होंने 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी से सीधी बात की है और उन्हें समझाया है कि शानदार फॉर्म के बावजूद टीम में जगह पाना हमेशा सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन पर निर्भर नहीं होता। गंभीर ने स्पष्ट किया कि ड्रेसिंग रूम में स्थिरता और सुरक्षा का माहौल बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

वैभव का सफर और चयन का पेचीदा समीकरण

वैभव सूर्यवंशी ने इस साल जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ 15 साल और 99 दिन की आयु में टी20 इंटरनेशनल डेब्यू करते हुए सचिन तेंदुलकर का दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ 15 साल और 118 दिन की उम्र में अर्धशतक जड़कर वे पुरुष इंटरनेशनल क्रिकेट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए।

हालांकि, अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज और जापान के खिलाफ एकमात्र टी20 मुकाबले में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। इसके बाद एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने वापसी की और 21 गेंदों पर 38 रन बनाकर अपनी अहमियत साबित की।

गंभीर ने क्या कहा

गंभीर ने 'जियोस्टार' से बातचीत में कहा, 'यह मेरे लिए भी एक नया अनुभव था। हाँ, वह अच्छी फॉर्म में थे, लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि कभी-कभी, उन खिलाड़ियों की वजह से जिन्होंने लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें अपने मौके का इंतजार करना पड़ सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'सोशल मीडिया या बाहर की बातें प्लेइंग इलेवन तय नहीं करतीं।'

गंभीर ने टीम चयन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हुए कहा, 'यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि ड्रेसिंग रूम का समीकरण कैसा है, कौन सा खिलाड़ी कोच और कप्तान को मैच जिताने की क्षमता रखता है, तथा टीम की सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन क्या है।'

अभिषेक और संजू सैमसन का जिक्र

गंभीर ने स्पष्ट किया कि वैभव को मौका देने का मतलब होगा किसी अनुभवी खिलाड़ी को बाहर बिठाना — और वह बातचीत आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा, 'अगर आज हम वैभव को मौका देते हैं, तो मेरे और टीम से बाहर होने वाले खिलाड़ी — चाहे वह अभिषेक हों या संजू सैमसन — के बीच बातचीत काफी मुश्किल होगी।' उनके अनुसार, जो खिलाड़ी पिछले डेढ़-दो साल से लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके संयोजन को अचानक नजरअंदाज करना संभव नहीं है।

एशियन गेम्स में ऐतिहासिक उपलब्धि

एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में वैभव 9 गेंदों पर 15 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन भारतीय टीम ने पाकिस्तान को हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के साथ 15 साल, छह महीने और 6 दिन की उम्र में वैभव एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए।

उन्होंने निशानेबाज सौरभ चौधरी का रिकॉर्ड तोड़ा, जो जकार्ता एशियन गेम्स 2018 में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीतते समय 16 साल, तीन महीने और 9 दिन के थे।

आगे की राह

गंभीर के इस बयान से साफ है कि वैभव के लिए टीम में स्थायी जगह बनाना अभी एक लंबी प्रक्रिया है। कोच की प्राथमिकता अनुभवी खिलाड़ियों को भरोसा देते हुए युवा प्रतिभाओं को धैर्य के साथ तैयार करना है — और यह नीति आने वाले महीनों में भारतीय चयन समिति की रणनीति को भी परिभाषित करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक अंतर्विरोध भी छिपा है — जो खिलाड़ी 15 साल में ही रिकॉर्ड तोड़ रहा हो, उसे 'इंतजार' की नीति में बाँधना भारतीय क्रिकेट के उस पुराने ढाँचे की याद दिलाता है जिसने कई प्रतिभाओं को 'सिस्टम' की भेंट चढ़ाया। ड्रेसिंग रूम में स्थिरता जरूरी है, लेकिन अगर 'सुरक्षा का माहौल' अनुभवी खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा से बचाने का पर्दा बन जाए, तो यह नीति उलटी पड़ सकती है। वैभव का एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतना और फिर भी प्लेइंग इलेवन की गारंटी न होना — यह भारतीय क्रिकेट चयन की जटिलता को उजागर करता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम गंभीर ने वैभव सूर्यवंशी को क्या समझाया?
गंभीर ने वैभव को बताया कि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद कभी-कभी खिलाड़ियों को अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि टीम में लंबे समय से बेहतर प्रदर्शन करने वाले अनुभवी खिलाड़ियों को पहले प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया का दबाव प्लेइंग इलेवन तय नहीं करता।
वैभव सूर्यवंशी ने कौन-से रिकॉर्ड तोड़े हैं?
वैभव ने जुलाई 2026 में 15 साल और 99 दिन की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू कर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा। इसके अलावा, जिम्बाब्वे के खिलाफ 15 साल और 118 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाकर वे पुरुष इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसा करने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बने।
एशियन गेम्स 2026 में वैभव का प्रदर्शन कैसा रहा?
सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ वैभव ने 21 गेंदों पर 38 रन बनाए। फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ वे 9 गेंदों पर 15 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन भारत ने मैच जीतकर लगातार दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
वैभव सूर्यवंशी एशियन गेम्स में सबसे युवा भारतीय गोल्ड मेडलिस्ट कैसे बने?
15 साल, छह महीने और 6 दिन की उम्र में एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड जीतकर वैभव ने निशानेबाज सौरभ चौधरी का रिकॉर्ड तोड़ा, जो 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में 16 साल, तीन महीने और 9 दिन की उम्र में स्वर्ण जीते थे।
गंभीर ने अभिषेक और संजू सैमसन का जिक्र क्यों किया?
गंभीर ने यह समझाने के लिए इन नामों का उल्लेख किया कि वैभव को मौका देने का अर्थ होगा किसी अनुभवी और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी को बाहर बिठाना, जो ड्रेसिंग रूम के संतुलन के लिहाज से एक कठिन निर्णय होगा।
राष्ट्र प्रेस
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