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गुरु हनुमान: भारतीय कुश्ती के आधुनिक युग के निर्माता, जिनके शिष्य बने ओलंपिक विजेता

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गुरु हनुमान: भारतीय कुश्ती के आधुनिक युग के निर्माता, जिनके शिष्य बने ओलंपिक विजेता

सारांश

जानिए कैसे गुरु हनुमान ने कुश्ती को नया रूप दिया और उनके शिष्यों ने ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया।

मुख्य बातें

गुरु हनुमान का वास्तविक नाम विजय पाल यादव था।
उन्होंने भारतीय कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई।
उनके शिष्यों ने कई ओलंपिक और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते।
गुरु हनुमान को 1983 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
उनका अखाड़ा भारतीय कुश्ती का सबसे पुराना स्कूल है।

नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कुश्ती भारत का एक प्राचीन खेल है जिसमें समय-समय पर ऐसे अद्वितीय पहलवानों का उदय होता है जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और निष्ठा से भारतीय कुश्ती को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। गुरु हनुमान के नाम से जाने जाने वाले विजय पाल यादव का नाम भी इस संदर्भ में प्रमुखता से लिया जाता है।

विजय पाल यादव का जन्म 15 मार्च 1901 को चिड़ावा, राजस्थान में हुआ। उन्होंने कभी स्कूल का मुँह नहीं देखा, परंतु कुश्ती के प्रति उनका जुनून बचपन से ही था। कुश्ती में कुछ बड़ा करने की चाहत ने उन्हें कम उम्र से ही अखाड़े में उतार दिया। 1919 में उन्होंने दिल्ली में बिड़ला मिल्स के पास एक दुकान खोली, लेकिन उनका मन कुश्ती में ही लगा रहा। जल्द ही उन्होंने पहलवानी में अपनी पहचान बना ली।

एक कोच और पहलवान के रूप में, गुरु हनुमान ने पारंपरिक भारतीय कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला और इसे एक आधुनिक रूप दिया। उन्होंने भारत के लगभग सभी प्रमुख फ्रीस्टाइल अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को कोचिंग दी। उनके शिष्य सुदेश कुमार और प्रेम नाथ ने 1958 में कार्डिफ कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीते थे। इसके अतिरिक्त, सतपाल और करतार सिंह ने क्रमश: 1982 और 1986 में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीते। उनके आठ शिष्यों को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। गुरु हनुमान शाकाहारी आहार को प्राथमिकता देते थे।

24 मई 1999 को हरिद्वार जाते समय मेरठ के पास एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया। उन्हें 1987 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और 1983 में पद्म श्री से नवाजा गया। 9 अगस्त 2003 को, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने नई दिल्ली के कल्याण विहार स्पोर्ट्स स्टेडियम में उनकी एक प्रतिमा का अनावरण किया।

भारतीय उद्योगपति के. के. बिड़ला ने उन्हें मलकागंज, सब्जी मंडी (पुरानी दिल्ली) में एक अखाड़ा खोलने के लिए भूमि प्रदान की, जिससे 1925 में 'बिड़ला मिल्स व्यायामशाला' की स्थापना हुई, जिसे बाद में गुरु हनुमान अखाड़ा के नाम से जाना गया। यह अखाड़ा पारंपरिक हिंदी बोली में पहलवानों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करता है।

1925 में रोशनआरा बाग के पास शक्ति नगर में स्थापित यह अखाड़ा भारत का सबसे पुराना मौजूदा कुश्ती स्कूल है। इस अखाड़े से कई महान पहलवान जैसे दारा सिंह, सुशील कुमार, योगेंद्र कुमार और विशाल त्रिखा निकले हैं। 2014 में, इस कुश्ती अकादमी को भारत सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए चुना था।

गुरु हनुमान के शिष्य सतपाल सिंह आज के समय के प्रमुख कुश्ती कोच हैं। उनके शिष्यों में सुशील कुमार और रवि दहिया जैसे नाम हैं, जिन्होंने ओलंपिक में देश के लिए पदक जीते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु हनुमान का असली नाम क्या था?
गुरु हनुमान का असली नाम विजय पाल यादव था।
गुरु हनुमान ने किस वर्ष में द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त किया?
गुरु हनुमान ने 1987 में द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त किया।
गुरु हनुमान का अखाड़ा कहाँ स्थित है?
गुरु हनुमान का अखाड़ा शक्ति नगर , दिल्ली में स्थित है।
गुरु हनुमान के प्रसिद्ध शिष्य कौन हैं?
गुरु हनुमान के प्रसिद्ध शिष्य सुशील कुमार और रवि दहिया हैं।
गुरु हनुमान का निधन कब हुआ?
गुरु हनुमान का निधन 24 मई 1999 को हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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