क्या कीर्ति आजाद क्रिकेट के बाद राजनीति की पिच पर लंबी पारी खेल रहे हैं?
सारांश
Key Takeaways
- कीर्ति आजाद का जन्म एक राजनीतिक परिवार में हुआ था।
- उन्होंने क्रिकेट में अपने करियर की शुरुआत 1980 में की।
- वे 1983 में विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे।
- राजनीति में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- कीर्ति आजाद एक उत्कृष्ट वक्ता हैं।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में क्रिकेट और राजनीति ऐसे क्षेत्र हैं जो किसी व्यक्ति को धन और प्रतिष्ठा की ऊंचाइयों पर पहुंचा सकते हैं। बहुत कम लोग हैं जिन्होंने इन दोनों क्षेत्रों में सफलता प्राप्त की है, और कीर्ति आजाद का नाम इनमें प्रमुखता से लिया जाता है।
कीर्ति आजाद का जन्म २ जनवरी १९५९ को बिहार के पुर्णिया में हुआ था। उनका जन्म एक राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता भागवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। राजनीतिक परिवेश के बावजूद, उन्होंने क्रिकेट में करियर बनाने का निर्णय लिया।
दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने वाले कीर्ति, दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर रहे।
उन्होंने भारत के लिए १९८० में डेब्यू किया और १९८३ में पहले विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। १९८० से १९८६ के बीच, उन्होंने ७ टेस्ट में १३५ रन और ३ विकेट लिए। वहीं, २५ वनडे में उन्होंने २६९ रन बनाए और ७ विकेट लिए।
घरेलू क्रिकेट में उन्होंने १९७६-७७ से १९९४ तक खेला। इस दौरान, १४२ प्रथम श्रेणी मैचों में, २० शतक की मदद से ६,६३४ रन और २३४ विकेट लिए। वहीं, ७२ लिस्ट ए मैचों में १,५२१ रन और ५० विकेट उनके नाम हैं।
क्रिकेट से संन्यास के बाद, कीर्ति आजाद ने राजनीति में कदम रखा। वे १९९३ से १९९८ तक दिल्ली के गोल मार्केट विधानसभा से विधायक रहे। इसके बाद, १९९९ से २००४ और फिर २००९ से २०१९ तक वे बिहार के दरभंगा से लोकसभा सदस्य रहे। २०२४ में, उन्होंने पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर सीट से चुनाव जीता।
इस प्रकार, क्रिकेट के बाद राजनीति में भी उन्होंने सफल पारी खेली है। कीर्ति आजाद, क्रिकेट के बाद राजनीति का रुख करने वाले इकलौते क्रिकेटर नहीं हैं, लेकिन अन्य क्रिकेटरों की तुलना में उनकी पारी अधिक लंबी रही है। वे एक श्रेष्ठ वक्ता हैं और अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं।