फीफा वर्ल्ड कप 2026: मटियास गैलार्जा का 64 सेकंड में गोल, टूर्नामेंट का सबसे तेज गोल का नया रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
पैराग्वे के मिडफील्डर मटियास गैलार्जा ने 20 जून 2026 को सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज मुकाबले में तुर्किये के खिलाफ महज 64 सेकंड में गोल दागकर टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज गोल का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। 24 वर्षीय इस मिडफील्डर ने बाएं पैर से जोरदार शॉट लगाते हुए पैराग्वे को मैच में 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई।
कैसे बना रिकॉर्ड
गैलार्जा टूर्नामेंट के पैराग्वे के पहले मुकाबले में प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं थे। तुर्किये के खिलाफ उन्हें शुरुआती एकादश में मौका मिला और उन्होंने एक पल भी गँवाए बिना मैच के 64वें सेकंड में ही गोल कर दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड मोरक्को के इस्माइल साइबारी के नाम था, जिन्होंने स्कॉटलैंड के खिलाफ 70 सेकंड में गोल करके रिकॉर्ड बनाया था। गैलार्जा ने उस रिकॉर्ड को 6 सेकंड पहले तोड़ दिया।
येलो कार्ड का झटका
गोल की खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी — गोल के महज दो मिनट बाद ही एक फाउल के बाद रेफरी ने गैलार्जा को येलो कार्ड दिखाया। यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से एक मिली-जुली शुरुआत रही, हालांकि रिकॉर्ड गोल की चमक बरकरार रही।
ग्रुप डी का समीकरण
यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए नॉकआउट स्टेज में पहुँचने की दृष्टि से निर्णायक था। पैराग्वे को अपने पहले मुकाबले में अमेरिका के खिलाफ 1-4 से हार झेलनी पड़ी थी, जबकि तुर्किये भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 0-2 से पराजित हो चुका था। ग्रुप डी में अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराकर पहले ही राउंड ऑफ 32 में अपनी जगह पक्की कर ली है।
पहले हाफ का हाल
गैलार्जा के शुरुआती गोल के बाद पैराग्वे ने मजबूत डिफेंस के दम पर 1-0 की बढ़त हाफ टाइम तक बरकरार रखी। तुर्किये ने पहले हाफ में गोल करने के कई प्रयास किए, लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति को भेदने में वह पूरी तरह नाकाम रहा। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों टीमें टूर्नामेंट में बने रहने के लिए जूझ रही हैं और हर गोल की कीमत दोगुनी हो जाती है।