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मौमा दास: टेबल टेनिस की चमकती सितारा, देश को दिलाए स्वर्ण पदक

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मौमा दास: टेबल टेनिस की चमकती सितारा, देश को दिलाए स्वर्ण पदक

सारांश

मौमा दास, भारतीय टेबल टेनिस की एक महान खिलाड़ी, ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने देश का नाम रोशन किया है। जानिए कैसे उन्होंने अपने करियर में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

मुख्य बातें

मौमा दास का जन्म २४ जनवरी, १९८४ को हुआ था।
उन्होंने २००० में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता।
मौमा ने ७५ देशों के खिलाफ ४०० से अधिक मैच खेले हैं।
उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
वर्तमान में वे ऑयल इंडिया लिमिटेड में काम कर रही हैं।

नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। टेबल टेनिस की दुनिया में मौमा दास का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। लंबे समय से इस खेल में सक्रिय मौमा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम गर्व से ऊंचा किया है।

मौमा दास का जन्म २४ जनवरी, १९८४ को नारकेलडांगा, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनके टेबल टेनिस में आने का मुख्य कारण उनके पिता प्रबीर दास थे, जो खेलों के प्रति उत्साही थे। इसी कारण उन्होंने बहुत छोटी उम्र में मौमा को टेबल टेनिस से परिचित कराया। समय के साथ, मौमा की इस खेल में रुचि बढ़ी और उन्होंने इसे अपने करियर के रूप में चुन लिया।

मौमा ने सीमित संसाधनों के बावजूद कठोर परिश्रम और समर्पण से टेबल टेनिस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित किया है। उनके खेल में आक्रामक रणनीतियाँ विरोधियों के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं। मौमा को उनके तेज रिफ्लेक्स और सटीक प्लेसमेंट के लिए जाना जाता है, और वे एकल एवं डबल्स दोनों में प्रमुख खिलाड़ी हैं। उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक २००० में याकुत्स्क में आयोजित दूसरे चिल्ड्रन ऑफ एशिया इंटरनेशनल स्पोर्ट्स गेम्स में जीता था। २०१० में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने भारतीय टीम को रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

दास ने १९९७ में मैनचेस्टर में अपनी पहली विश्व टेबल टेनिस चैम्पियनशिप में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने कुआलालंपुर (२०००), ओसाका (२००१), पेरिस (२००३), दोहा (२००४), ब्रेमेन (२००६), जाग्रेब (२००७), ग्वांगझू (२००८), योकोहामा (२००९), मॉस्को (२०१०), रॉटरडैम (२०११), डॉर्टमुंड (२०१२), पेरिस (२०१३), सूजौ (२०१५), कुआलालंपुर (२०१६), और डसेलडोर्फ (२०१७) में भी खेला। उन्होंने थाईलैंड की कोमवोन नानथाना के साथ मिलकर १७ बार अपने देश का प्रतिनिधित्व किया, जो किसी भी एशियाई द्वारा सबसे अधिक है।

मौमा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला टीम के साथ २००६ में कांस्य, २०१० में रजत, महिला डबल्स में २०१० में कांस्य, २०१८ में महिला टीम के साथ स्वर्ण और महिला डबल्स में रजत पदक जीते हैं। साउथ एशियन गेम्स में भी उन्होंने टीम इवेंट और महिला सिंगल और डबल में स्वर्ण पदक जीते हैं।

मौमा दास ने ७५ देशों के खिलाफ ४०० से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उन्हें २०१३ में अर्जुन पुरस्कार और २०२१ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वर्तमान में वे ऑयल इंडिया लिमिटेड में कार्यरत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौमा दास का जन्म कब हुआ?
मौमा दास का जन्म २४ जनवरी, १९८४ को हुआ था।
मौमा दास ने कौन सा पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता?
उन्होंने अपना पहला स्वर्ण पदक २००० में याकुत्स्क में जीता।
मौमा दास ने कितने देशों के खिलाफ मैच खेले हैं?
मौमा ने ७५ देशों के खिलाफ ४०० से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं।
मौमा दास को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है?
उन्हें २०१३ में अर्जुन पुरस्कार और २०२१ में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
वर्तमान में मौमा दास कहाँ कार्यरत हैं?
वे ऑयल इंडिया लिमिटेड में कार्यरत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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