तेजस्विन शंकर ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में देरी पर मंत्रालय की आलोचना की

Click to start listening
तेजस्विन शंकर ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में देरी पर मंत्रालय की आलोचना की

सारांश

तेजस्विन शंकर ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की घोषणा में देरी को युवा मामले और खेल मंत्रालय की विफलता बताया है। यह देरी एथलीटों के लिए अपमानजनक है और हतोत्साहित करने वाली है। जानें पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • तेजस्विन शंकर ने मंत्रालय की देरी की आलोचना की।
  • एथलीटों का हतोत्साहित होना एक गंभीर मुद्दा है।
  • राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की तारीखें आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।
  • मंत्रालय का पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी का कारण है।
  • पुरस्कार समारोह में उच्च सम्मानित एथलीटों को पुरस्कार दिए जाते हैं।

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता डेकाथलॉन एथलीट तेजस्विन शंकर ने राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की घोषणा में हुई देरी के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय की कड़ी आलोचना की है। शंकर ने इसे एथलीटों के लिए अपमानजनक और हतोत्साहित करने वाला बताया है।

तेजस्विन ने एक्स पर साझा किया, "दिसंबर में अनाधिकारिक नामों की घोषणा से पहले इस मुद्दे पर विचार किया जाना चाहिए था। चार महीने की देरी ने न केवल एथलीटों और कोचों को हतोत्साहित किया है, बल्कि यह एक अपमान की भी निशानी है।"

मंत्रालय के अनुसार, "राष्ट्रीय खेल पुरस्कार कार्यक्रम की तैयारी जारी है। एथलीटों की सूची का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है, यही कारण है कि कुछ देरी हो रही है। जल्द ही पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जाएगा।"

पुरस्कार समारोह में देरी पर एथलीटों में काफी आक्रोश है। उनका मानना है कि पुनर्मूल्यांकन उन एथलीटों पर अत्यधिक दबाव डाल रहा है जिन्होंने पहले ही सभी आवश्यकताएँ पूरी कर ली हैं।

मंत्रालय ने पिछले वर्ष 29 सितंबर को वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों (मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड, अर्जुन अवॉर्ड, द्रोणाचार्य अवॉर्ड, और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार) के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे, जिसे बाद में 4 नवंबर तक बढ़ा दिया गया था।

24 दिसंबर को चयन समिति की बैठक में खेल मंत्रालय को भेजी गई सूची में कम से कम 24 नाम थे, जिसमें अर्जुन अवॉर्ड के लिए तेजस्विन का नाम भी शामिल था। लेकिन, वर्तमान में यह प्रक्रिया अटकी हुई है।

पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाते हैं। आमतौर पर समारोह का आयोजन 29 अगस्त को, मेजर ध्यानचंद की जयंती पर होता है। जिन वर्षों में ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेल होते हैं, उन वर्षों में समारोह की तिथि इन खेलों की अंतिम तिथियों को ध्यान में रखते हुए और भारत के राष्ट्रपति के सचिवालय की सलाह से तय की जाती है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों की घोषणा में देरी केवल एथलीटों के मनोबल को प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह मंत्रालय की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाती है। इस मामले में तात्कालिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में देरी का कारण क्या है?
मंत्रालय के अनुसार, पुरस्कारों की तैयारी और एथलीटों की सूची का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है, जिससे देरी हो रही है।
तेजस्विन शंकर ने क्या कहा?
तेजस्विन ने कहा कि इस देरी ने एथलीटों और कोचों को हतोत्साहित किया है और यह एक अपमान की निशानी है।
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार कब दिए जाते हैं?
ये पुरस्कार आमतौर पर 29 अगस्त को, मेजर ध्यानचंद की जयंती पर दिए जाते हैं।
क्या एथलीटों में इस देरी को लेकर असंतोष है?
जी हाँ, कई एथलीट इस देरी को लेकर आक्रोशित हैं और इसे अत्यधिक दबाव का कारण मानते हैं।
कौन-कौन से पुरस्कार शामिल हैं?
इनमें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड, अर्जुन अवॉर्ड, द्रोणाचार्य अवॉर्ड और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार शामिल हैं।
Nation Press