पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को 8 विकेट से रौंदा, क्वींस पार्क टेस्ट जीतकर सीरीज 1-1 से बराबर
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान ने 5 अगस्त 2025 को त्रिनिदाद के क्वींस पार्क ओवल में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन वेस्टइंडीज को 8 विकेट से पराजित कर दो मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। मेहमान टीम के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि पहले टेस्ट में वेस्टइंडीज ने उन्हें 90 रन से शिकस्त दी थी।
मुख्य घटनाक्रम
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज ने अपनी पहली पारी में 344 रन का स्कोर खड़ा किया। कप्तान रोस्टन चेज (70 रन) और जस्टिन ग्रीव्स (73 रन) ने छठे विकेट के लिए 96 रन की अहम साझेदारी निभाई। ब्रैंडन किंग ने भी 46 रन का योगदान दिया। पाकिस्तान की गेंदबाजी में साजिद खान सबसे प्रभावी रहे और उन्होंने 4 विकेट चटकाए, जबकि मोहम्मद अली, उबैद शाह और अली उस्मान ने 2-2 विकेट लिए।
पाकिस्तान की पहली पारी में दबदबा
जवाब में पाकिस्तान ने पहली पारी में 387 रन बनाकर 43 रन की बढ़त हासिल की। अब्दुल्ला शफीक ने कप्तान बाबर आजम के साथ तीसरे विकेट के लिए 183 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत नींव दी। बाबर ने 11 चौकों की मदद से 88 रन बनाए, वहीं शफीक 18 चौकों के साथ 160 रन बनाकर नाबाद रहे। वेस्टइंडीज की ओर से जोमेल वारिकन ने 6 विकेट लेकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जबकि शमर जोसेफ को 2 विकेट मिले।
वेस्टइंडीज की दूसरी पारी का पतन
दूसरी पारी में वेस्टइंडीज महज 46.1 ओवरों में 117 रन पर सिमट गई। टैगेनारिन चंद्रपॉल (17 रन) और कावेम हॉज (34 रन) ने पहले विकेट के लिए 40 रन जोड़े, लेकिन इस जोड़ी के टूटते ही पूरी बल्लेबाजी क्रम बिखर गया। केवल पाँच बल्लेबाज दहाई का आँकड़ा छू सके। चोटिल ब्रैंडन किंग इस पारी में बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे। पाकिस्तान के लिए अली उस्मान ने 39 रन देकर 4 विकेट और साजिद खान ने 32 रन देकर 4 विकेट लिए।
पाकिस्तान की आसान जीत
जीत के लिए पाकिस्तान को मात्र 75 रन की जरूरत थी। पारी की शुरुआत में 15 रन पर इमाम-उल-हक (9 रन) और 42 रन पर अजान ओवैस (18 रन) के विकेट गिरे, लेकिन कप्तान बाबर आजम और अब्दुल्ला शफीक ने तीसरे विकेट के लिए 35 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को आसानी से मंजिल तक पहुँचा दिया। गौरतलब है कि यह पाकिस्तान के लिए वेस्टइंडीज की धरती पर हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण वापसी है, जो पहले टेस्ट की निराशाजनक हार के बाद मनोबल के लिहाज से बेहद जरूरी थी।