क्या सुरेश कलमाड़ी विवादों में रहे? राजनीति और खेल प्रशासन के दिग्गज की कहानी
सारांश
Key Takeaways
- सुरेश कलमाड़ी का निधन 6 जनवरी को हुआ।
- उन्होंने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन पर घोटाले के आरोप लगे थे, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई।
- वह 1982 से 2004 तक राज्यसभा और 2004 से 2014 तक लोकसभा के सदस्य रहे।
- उनकी राजनीतिक यात्रा का आरंभ वायु सेना से हुआ था।
पुणे, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार की सुबह पुणे स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनकी आयु 82 वर्ष थी। कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता के रूप में, सुरेश कलमाड़ी ने खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उनकी भूमिका बेहद प्रमुख रही थी।
सुरेश कलमाड़ी, जो 1996 से 2011 तक भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रहे, ने 3 से 14 अक्टूबर 2010 तक कॉमनवेल्थ गेम्स का सफल आयोजन किया। इस आयोजन के दौरान दिल्ली में हुए विकास कार्यों ने शहर का रूप बदल दिया, लेकिन इस वैश्विक खेल आयोजन पर घोटाले के आरोप भी लगे। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास बने पैदल यात्री पुल के ढहने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ बटोरीं। आयोजन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसके चलते सुरेश कलमाड़ी को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ा था। 2022 में उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, सबूतों के अभाव में उन्हें अप्रैल 2025 में जमानत मिल गई।
घोटाले के आरोपों ने सुरेश कलमाड़ी की राजनीतिक करियर पर बड़ा असर डाला। वे 1982 से 2004 तक राज्यसभा के सदस्य रहे और 2004 से 2014 तक लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया।
राजनीति और खेल प्रशासन में आने से पहले कलमाड़ी ने 1960 के दशक की शुरुआत में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में दाखिला लिया और फिर भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में कार्य किया। उन्होंने छह वर्ष तक वायु सेना में सेवाएं दीं और बाद में 1974 तक एनडीए में ट्रेनर रहे। उन्होंने 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भाग लिया। संजय गांधी ने उन्हें राजनीति में लाने का कार्य किया।
सुरेश कलमाड़ी, जो केंद्र की राजनीति में महाराष्ट्र से एक प्रमुख नाम थे, रेल राज्य मंत्री रह चुके हैं और पुणे के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी मुख्य भूमिका रही है।