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क्या अमेरिकी टैरिफ ने बनारसी साड़ी उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है?

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क्या अमेरिकी टैरिफ ने बनारसी साड़ी उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है?

सारांश

बनारसी साड़ी का उद्योग संकट में है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर बुनकरों की आजीविका पर पड़ रहा है। क्या सरकार समय पर कदम उठाएगी?

मुख्य बातें

बनारसी साड़ी उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ का गहरा असर है।
प्रतिवर्ष 200 से 300 करोड़ रुपए का निर्यात खतरे में है।
बुनकरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
जीएसटी में छूट से उद्योग को राहत मिल सकती है।

वाराणसी, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ी और सिल्क उद्योग पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ का गहरा असर पड़ रहा है। टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिका से बड़े ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और विदेशी व्यापारियों ने माल वापस करना शुरू कर दिया है।

वाराणसी वस्त्र उद्योग संगठन के अनुसार यदि यह स्थिति बनी रही तो शहर को सालाना 300 करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है। इस संकट ने हजारों कारीगरों की आजीविका को खतरे में डाल दिया है और उद्योग में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है।

बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजन बहल ने बताया, "टैरिफ के कारण बनारसी साड़ी के निर्यात में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आएगी। हैंडलूम उत्पादों का निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। अभी नुकसान का आकार छोटा दिख सकता है, लेकिन भविष्य में इसका असर गंभीर होगा। अमेरिका में हर साल 200 से 300 करोड़ रुपए का माल निर्यात होता था, जो अब खतरे में है। ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और नए ऑर्डर की उम्मीद भी नहीं दिख रही। मेरा साफ तौर पर मानना है कि यह छोटा नुकसान नहीं है, यह बनारस और यहां के उद्योग के लिए बड़ा नुकसान है। ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं और हम आगे ऑर्डर मिलने की उम्मीद ही नहीं कर सकते हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि हैंडलूम की संख्या पहले ही घट रही है, और टैरिफ का असर इसे और कम करेगा। मैं सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करता हूं ताकि उद्योग को बचाया जा सके।

वहीं स्थानीय साड़ी व्यापारी सर्वेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा, "टैरिफ का हमारे व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है। मेरा 10 लाख रुपये का माल हाल ही में वापस आया है। बुनकरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। तैयार माल को होल्ड कर दिया गया है, और पेमेंट भी अटक गया है। मेरे यहां 20 कर्मचारी काम करते हैं और 20 लाख रुपए का माल होल्ड होने से भारी नुकसान हुआ है।"

उन्होंने आगे बताया कि पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे व्यापारी अब टैरिफ की मार से और दबाव में हैं।

सर्वेश कुमार श्रीवास्तव ने सरकार से हैंडलूम और हस्तशिल्प को जीएसटी से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने कहा, "हैंडलूम और हस्तशिल्प पर 5 प्रतिशत जीएसटी हटाने से उद्योग को राहत मिल सकती है। इससे घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी और मध्यम वर्ग फिर से बनारसी साड़ियों की ओर आकर्षित होगा।"

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जीएसटी में छूट से उद्योग में नया उछाल आ सकता है, जिससे बुनकरों और व्यापारियों को संबल मिलेगा। टैरिफ के कारण उत्पन्न संकट ने न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि हजारों कारीगरों के परिवारों की आजीविका को भी खतरे में डाल दिया है। सरकार को तत्काल इस मामले में दखल देना चाहिए। यदि सरकार ने जल्द से जल्द कोई कदम नहीं उठाए, तो यह उद्योग और गहरे संकट में फंस सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय उद्योग को गंभीर चुनौती दी है। इसे केवल एक व्यापारिक समस्या नहीं माना जा सकता, बल्कि यह लाखों लोगों की आजीविका का प्रश्न है। सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि बुनकरों और व्यापारियों को राहत मिल सके।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी टैरिफ का बुनकरों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
अमेरिकी टैरिफ के कारण बुनकरों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है, जिससे उनके रोजगार और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
क्या सरकार ने इस मामले में कोई कदम उठाया है?
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
बनारसी साड़ी का निर्यात कितना प्रभावित हुआ है?
टैरिफ के कारण बनारसी साड़ी का निर्यात 15 से 20 प्रतिशत तक प्रभावित होने की संभावना है।
क्या जीएसटी में छूट से समस्या हल हो सकती है?
जीएसटी में छूट से घरेलू बाजार में मांग बढ़ सकती है, जो उद्योग को राहत देगी।
क्या बुनकरों की संख्या कम हो रही है?
हां, पहले से ही हैंडलूम की संख्या में कमी आ रही है, और टैरिफ का असर इसे और कम करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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