अमृतसर खासा कैंट IED ब्लास्ट केस सुलझा: तीन गिरफ्तार, ग्लॉक पिस्टल और हैंड ग्रेनेड बरामद
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब पुलिस ने अमृतसर में दो अलग-अलग आतंकी मामलों में 13 अक्टूबर 2026 को बड़ी कार्रवाई करते हुए खासा कैंट IED विस्फोट केस को सुलझाने का दावा किया है। बॉर्डर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गुरप्रीत सिंह भुल्लर के अनुसार, 5-6 मई 2026 की रात को हुए इस विस्फोट के सिलसिले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इसी के साथ एक केंद्रीय एजेंसी के साथ संयुक्त अभियान में 9 एमएम ग्लॉक पिस्टल और ARGES मेक का एक हैंड ग्रेनेड भी जब्त किया गया है।
खासा कैंट IED मामले का पर्दाफाश
अमृतसर देहाती पुलिस ने लंबी जांच और गहन पूछताछ के बाद खासा कैंट IED विस्फोट मामले को सुलझाने का दावा किया है। इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों के नाम रमनदीप, जजप्रीत और अर्शदीप बताए गए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, रमनदीप और जजप्रीत कथित तौर पर सीमा क्षेत्र से IED लेकर आए और उसे अपने पास रखा। बाद में बाहरी हैंडलरों के निर्देश पर उन्होंने यह IED अर्शदीप और उसके एक साथी को सौंप दी।
आईजी भुल्लर ने बताया कि अर्शदीप और उसके साथियों ने सोशल मीडिया ऐप और वीडियो कॉल के ज़रिए विस्फोटक रखने और उसे सक्रिय करने का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर खासा कैंट की दीवार के बाहर IED रखी और मोबाइल के माध्यम से उसे दूर से सक्रिय किया। विस्फोट के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
गौरतलब है कि रमनदीप और जजप्रीत को पहले एफआईआर संख्या 224 के संदर्भ में दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इसी पूछताछ के दौरान पुराने IED विस्फोट से जुड़े तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले को ट्रेस किया।
दूसरी कार्रवाई: ग्लॉक पिस्टल और हैंड ग्रेनेड बरामद
अमृतसर देहाती पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के संयुक्त अभियान में 9 एमएम ग्लॉक पिस्टल और ARGES मेक का हैंड ग्रेनेड बरामद किया गया। इस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी मोगा जिले के निवासी बताए गए हैं। आईजी के अनुसार, इन लोगों को सीमा क्षेत्र से हथियार और विस्फोटक सामग्री हासिल करने के निर्देश दिए गए थे और बाद में उन्हें यह भी बताया जाना था कि इन हथियारों का इस्तेमाल कहाँ करना है।
इसी कड़ी में हरमन नाम के एक अन्य संदिग्ध को भी हाल ही में गिरफ्तार किया गया है, जो मोगा जिले का निवासी बताया गया है। हरमन कथित तौर पर विदेश में बैठे हैंडलरों के सीधे संपर्क में था।
आर्थिक लालच का जाल
दोनों मामलों में एक साझा पहलू सामने आया है — आरोपियों को बड़े आर्थिक लाभ का लालच दिया गया था। कथित तौर पर उनसे वादा किया गया था कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के बदले उन्हें बड़ी रकम भेजी जाएगी। यह पैटर्न पंजाब में पहले उजागर हो चुके कई आतंकी मॉड्यूलों से मेल खाता है, जहाँ सीमा पार हैंडलर युवाओं को आर्थिक प्रलोभन देकर अपने नेटवर्क में शामिल करते हैं।
पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
आईजी गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने आतंकी और देशविरोधी गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए पुलिस अधीक्षक कंवरप्रीत सिंह चहल और उनकी टीम की सराहना की। उन्होंने बताया कि दोनों मामलों में कुल छह संदिग्धों की गिरफ्तारी की गई है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब पंजाब में सीमा पार से हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल सक्रिय करने की घटनाओं पर सुरक्षा एजेंसियाँ पैनी नज़र रख रही हैं। दोनों मामलों में आगे की जांच जारी है और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश की जा रही है।