परिसीमन पर अन्नामलाई: दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा हो, केंद्र पारदर्शी रहे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व नेता के. अन्नामलाई ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को कोयंबटूर में मीडिया से बातचीत के दौरान परिसीमन प्रक्रिया पर केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश दिया — यह प्रक्रिया सभी राज्यों के लिए निष्पक्ष होनी चाहिए और बिना पारदर्शिता के इसे जल्दबाजी में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या नियंत्रण में सफलता का हवाला देते हुए कहा कि इन राज्यों के हितों की रक्षा परिसीमन प्रक्रिया में की जानी चाहिए।
परिसीमन पर अन्नामलाई का रुख
अन्नामलाई ने कहा कि परिसीमन देश के लिए ज़रूरी है, लेकिन इसे हर राज्य के साथ न्यायसंगत तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन विधेयक में 50 प्रतिशत आनुपातिक प्रतिनिधित्व वृद्धि का जो वादा किया गया था, उसका कोई स्पष्ट प्रावधान उन्हें विधेयक में नहीं मिला। अन्नामलाई ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस वादे को अमल में लाएगी।
गौरतलब है कि यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब दक्षिणी राज्यों — विशेषकर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश — में इस आशंका को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर उन्हें संसद में अपनी मौजूदा सीटों से हाथ धोना पड़ सकता है। अन्नामलाई ने संसद सत्र केवल पाँच दिन पहले घोषित किए जाने और सभी सांसदों को बुलाए जाने पर उठे सवालों का भी उल्लेख किया।
तमिलनाडु की राजनीति: गठबंधन में दरारें
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर अन्नामलाई ने कहा कि तमिलागा वेत्री कड़गम (TVK) के नेतृत्व वाले गठबंधन में असंतोष स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) भी इस गठबंधन का हिस्सा है और गठबंधन में शामिल वामपंथी दलों के बीच भी तनाव की स्थिति है। हालिया चुनाव में वामपंथी दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने को उन्होंने इसी दरार का संकेत बताया।
अन्नामलाई ने VCK में भी मतभेदों की ओर इशारा करते हुए कहा कि थोल थिरुमावलवन को लेकर पार्टी के भीतर कुछ असहजता दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वाइको ने तमिलनाडु प्रशासन में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है।
सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर चिंता
दिल्ली में सीजेपी (CJP) के प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामले पर अन्नामलाई ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में कानून का शासन सभी के लिए एक समान होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले की सुनवाई कर रहे एक न्यायाधीश ने स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया है और अदालत में CJP की ओर से पेश वकीलों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि वे CJP के विरोध-प्रदर्शन के कुछ तरीकों और उसके सदस्यों की कुछ गतिविधियों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका वे समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि नियम उल्लंघन के आरोप में की गई गिरफ्तारी और हिरासत में व्यवहार को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख के भागवत के बयान का स्वागत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्नामलाई ने कहा कि भागवत के बयानों पर देश की बड़ी संख्या में लोगों की नजर रहती है। उन्होंने भागवत की उस बात का स्वागत किया जिसमें उन्होंने अमेरिका यात्रा के दौरान कहा था कि भारत सभी समुदायों का देश है और कोई भी यह कहे कि मुसलमानों व अन्य धर्मों के लोगों के लिए भारत में जगह नहीं है, तो वह गलत है।
भारत की वैश्विक छवि पर जोर
अन्नामलाई ने कहा कि आज दुनिया में भारत और उसकी सभ्यता के प्रति रुचि बढ़ रही है। उन्होंने देश के नेताओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे उन उच्च मानकों के अनुरूप आचरण करें जिन्हें भारत ने सदा अपने लिए निर्धारित किया है, ताकि विश्व के सामने देश की बेहतर छवि प्रस्तुत हो सके। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और वैश्विक भूमिका को लेकर व्यापक चर्चाएँ जारी हैं।