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आशा पारेख ने धाराप्रवाह मराठी में की 'असेन मी नसेन मी' नाटक की तारीफ, अमृता सुभाष की टीम हुई भावुक

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आशा पारेख ने धाराप्रवाह मराठी में की 'असेन मी नसेन मी' नाटक की तारीफ, अमृता सुभाष की टीम हुई भावुक

सारांश

दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित आशा पारेख मुंबई में अमृता सुभाष के मराठी नाटक 'असेन मी नसेन मी' का मंचन देखने पहुँचीं और धाराप्रवाह मराठी में कलाकारों की तारीफ की। उनका यह उद्गार नाटक की टीम के लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं था।

मुख्य बातें

आशा पारेख ने मुंबई में अमृता सुभाष के मराठी नाटक 'असेन मी नसेन मी' का मंचन देखा।
उन्होंने धाराप्रवाह मराठी में कलाकारों के अभिनय की सराहना की और दोबारा नाटक देखने की इच्छा जताई।
नाटक की विषयवस्तु ने आशा पारेख को व्यक्तिगत स्तर पर प्रभावित किया; उन्होंने कहा कि इसने उन्हें सतर्क रहने की प्रेरणा दी।
अमृता सुभाष ने वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर इस यादगार मुलाकात को सार्वजनिक किया।
आशा पारेख को 1992 में पद्म श्री और 2022 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

दिग्गज अभिनेत्री आशा पारेख ने हाल ही में मुंबई में अमृता सुभाष के मराठी नाटक 'असेन मी नसेन मी' का मंचन देखा और धाराप्रवाह मराठी में कलाकारों के अभिनय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई और नाटक की टीम के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक करने वाला रहा।

नाटक देखकर क्या बोलीं आशा पारेख

अमृता सुभाष ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया जिसमें आशा पारेख नाटक के अपने अनुभव के बारे में बात करती नज़र आती हैं। वीडियो में उन्होंने मराठी में कहा, 'आज मैं यह नाटक देखने आई थी। मुझे यह बहुत अच्छा लगा।'

कलाकारों की तारीफ करते हुए उन्होंने आगे कहा, 'इस लड़की ने बहुत बढ़िया काम किया है। मेरा मन कर रहा है कि मैं फिर से आकर यह नाटक देखूं।' यह उद्गार किसी भी कलाकार की टीम के लिए एक बड़ी प्रेरणा की तरह था।

नाटक के विषय ने किया भावनात्मक प्रभाव

आशा पारेख ने यह भी स्वीकार किया कि नाटक का विषय उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर छू गया। उन्होंने कहा, 'इसे देखने में मुझे थोड़ा डर लगा क्योंकि ऐसा मेरे साथ भी हो सकता है। मुझे इस बारे में सावधान रहना चाहिए।' यह टिप्पणी नाटक की विषयवस्तु की गहराई और उसकी व्यापक सामाजिक प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।

अमृता सुभाष ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि आशा पारेख का नाटक देखने आना और पूरी टीम से मिलकर बातचीत करना उनके लिए एक यादगार और खुशी का अवसर था। नाटक 'असेन मी नसेन मी' ने अपने कथ्य और अभिनय की बदौलत मराठी रंगमंच प्रेमियों के बीच खासी चर्चा बटोरी है।

आशा पारेख: एक परिचय

गौरतलब है कि आशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता गुजराती थे, जबकि उनकी माँ दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय से थीं। मुंबई में पली-बढ़ीं आशा पारेख ने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी।

हिंदी सिनेमा के चार दशकों से भी लंबे सफर में उन्होंने 'तीसरी मंजिल', 'कटी पतंग', 'कारवां' और 'लव इन टोक्यो' जैसी कालजयी फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। भारतीय सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान के सम्मान में उन्हें 1992 में पद्म श्री और 2022 में प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया।

मराठी रंगमंच के लिए क्या मायने रखता है यह पल

यह ऐसे समय में आया है जब मराठी रंगमंच लगातार नई विषयवस्तु और प्रयोगधर्मी प्रस्तुतियों के ज़रिए व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। आशा पारेख जैसी बॉलीवुड की दिग्गज हस्ती का इस मंच पर आना और धाराप्रवाह मराठी में प्रशंसा करना, मराठी नाटकों की पहुँच और प्रतिष्ठा दोनों के लिए उत्साहजनक संकेत है। आने वाले दिनों में 'असेन मी नसेन मी' को इस प्रचार से और अधिक दर्शक मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मराठी मंच की बढ़ती साख का संकेत है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि बॉलीवुड की पहली पंक्ति के कलाकार क्षेत्रीय रंगमंच से किस हद तक जुड़ते हैं — और क्या यह जुड़ाव सिर्फ सोशल मीडिया की एक पोस्ट तक सीमित है या इसके आगे भी जाता है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'असेन मी नसेन मी' नाटक क्या है?
'असेन मी नसेन मी' अमृता सुभाष की एक मराठी नाट्य प्रस्तुति है जो मुंबई में मंचित की जा रही है। यह नाटक अपनी विषयवस्तु और कलाकारों के अभिनय के कारण मराठी रंगमंच प्रेमियों के बीच चर्चा में है।
आशा पारेख ने 'असेन मी नसेन मी' के बारे में क्या कहा?
आशा पारेख ने धाराप्रवाह मराठी में कहा कि नाटक उन्हें बहुत अच्छा लगा और वे दोबारा इसे देखना चाहती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नाटक की विषयवस्तु ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से सोचने पर मजबूर किया।
आशा पारेख कौन हैं और उनकी उपलब्धियाँ क्या हैं?
आशा पारेख हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री हैं जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 'तीसरी मंजिल', 'कटी पतंग' और 'कारवां' जैसी क्लासिक फिल्मों में काम किया और उन्हें 1992 में पद्म श्री तथा 2022 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अमृता सुभाष ने आशा पारेख की यात्रा के बारे में क्या बताया?
अमृता सुभाष ने सोशल मीडिया पर नाटक की झलकियाँ और आशा पारेख का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि आशा पारेख का नाटक देखने आना और टीम से मिलकर बातचीत करना उनके लिए अत्यंत खुशी का क्षण था।
क्या आशा पारेख मराठी बोल सकती हैं?
हाँ, वीडियो में आशा पारेख को धाराप्रवाह मराठी में बात करते हुए देखा जा सकता है। मुंबई में जन्मी और पली-बढ़ी होने के कारण उनकी मराठी पर अच्छी पकड़ है।
राष्ट्र प्रेस
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