आशा भोसले के अवार्ड्स: दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से पद्म विभूषण तक

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आशा भोसले के अवार्ड्स: दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से पद्म विभूषण तक

सारांश

आशा भोसले की अद्भुत संगीत यात्रा और उनके द्वारा प्राप्त पुरस्कारों की सूची उनके करियर की महानता की गवाही देती है। जानिए कैसे उन्होंने भारतीय संगीत जगत में अपनी पहचान बनाई।

Key Takeaways

  • आशा भोसले ने 70 वर्षों का संगीत करियर जिया।
  • उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे पुरस्कार मिले।
  • सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार 7 बार जीते।
  • गज़ल और कैबरे में भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा देखने को मिली।
  • आशा भोसले का योगदान भारतीय संगीत में अनमोल है।

मुंबई, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सुरों की रानी आशा भोसले हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनकी मधुर आवाज और अविस्मरणीय उपलब्धियां हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी। केवल नौ वर्ष की उम्र से गाना शुरू करने वाली आशा भोसले ने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में हजारों गाने गाए और सभी संगीत शैलियों में अपनी छाप छोड़ी।

शुरुआत में उन्हें मुख्य रूप से कैबरे और डांस नंबर्स गाने का अवसर मिला, लेकिन बाद में उन्होंने 'उमराव जान' जैसी फिल्मों में गज़ल गाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा को सिद्ध किया। आशा भोसले को भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिले हैं, जिनमें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और कई फिल्मफेयर तथा नेशनल अवॉर्ड शामिल हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल उनकी प्रतिभा का प्रमाण हैं, बल्कि उनकी मेहनत और समर्पण का भी संकेत देती हैं।

आशा भोसले ने न केवल बॉलीवुड में, बल्कि जैज और शास्त्रीय संगीत में भी अपनी मास्टर क्लास दी। लता मंगेशकर के बाद हिंदी फिल्म संगीत की सबसे बड़ी आवाज मानी जाने वाली आशा भोसले ने कई पीढ़ियों को मोहित किया।

आशा ताई को कई फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, जिनमें से उन्होंने सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर पुरस्कार 7 बार जीता। ये पुरस्कार उन्होंने कई गानों के लिए प्राप्त किए, जिनकी सूची यहां दी गई है:

1968: 'गरीबों की सुनो' (फिल्म - दस लाख)
1969: 'पर्दे में रहने दो' (शिकार)
1972: 'पिया तू अब तो आजा' (कारवां)
1973: 'दम मारो दम' (हरे रामा हरे कृष्णा)
1974: 'होने लगी है रात' (नैना)
1975: 'चैन से हमको कभी' (प्राण जाए पर वचन न जाए)
1979: 'ये मेरा दिल' (डॉन)

इसके अतिरिक्त, उन्हें 1996 में फिल्म 'रंगीला' के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड और 2001 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिला। आशा भोसले को दो बार सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। पहला 1981 में फिल्म 'उमराव जान' के 'दिल चीज क्या है' के लिए और दूसरा 1986 में फिल्म 'इजाजत' के 'मेरा कुछ सामान' के लिए।

अन्य प्रमुख सम्मान की बात करें तो आशा भोसले को भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए सबसे बड़ा सम्मान 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला। वहीं, देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान 2008 में पद्म विभूषण से नवाजा गया। उन्हें नाइटिंगेल ऑफ एशिया अवॉर्ड 1987 में मिला। सिंगर ऑफ द मिलेनियम का खिताब उन्हें 2000 में मिला। इसके अलावा, आईफा अवॉर्ड 2002 में फिल्म 'लगान' के गाने 'राधा कैसे न जले' के लिए प्राप्त हुआ।

Point of View

बल्कि यह समर्पण और मेहनत का प्रतीक भी है। उनकी उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि प्रतिभा और मेहनत का संगम किसी भी क्षेत्र में सफलता दिला सकता है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

आशा भोसले को कितने फिल्मफेयर पुरस्कार मिले हैं?
आशा भोसले को सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर पुरस्कार 7 बार मिला है।
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार कब मिला?
आशा भोसले को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2000 में मिला था।
आशा भोसले का सबसे प्रसिद्ध गाना कौन सा है?
आशा भोसले के कई प्रसिद्ध गाने हैं, लेकिन 'दम मारो दम' और 'पिया तू अब तो आजा' को बेहद लोकप्रियता मिली।
उन्हें पद्म विभूषण कब मिला?
आशा भोसले को पद्म विभूषण 2008 में दिया गया था।
आशा भोसले की उम्र कब से गाने लगी थीं?
आशा भोसले ने 9 साल की उम्र से गाना शुरू किया था।
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