क्या अमेरिका पर निर्भरता यूरोपीय संघ के लिए मुसीबत बनी है?

Click to start listening
क्या अमेरिका पर निर्भरता यूरोपीय संघ के लिए मुसीबत बनी है?

सारांश

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हो रहे मुक्त व्यापार समझौते पर नज़रें। अमेरिका की भूमिका और ट्रंप के निर्णयों से उत्पन्न तनाव। क्या भारत बन पाएगा यूरोप का नया भरोसेमंद साथी?

Key Takeaways

  • मुक्त व्यापार समझौता 27 जनवरी को हो रहा है।
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के निर्णयों से यूरोपीय संघ की स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा है।
  • भारत को अब एक संभावित स्थिर साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।
  • ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप का रुख बदल रहा है।
  • अमेरिका और ईयू के संबंधों में तनाव बढ़ रहा है।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और यूरोपीय यूनियन के लिए 27 जनवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जा रहा है। दरअसल, मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। साथ ही, रक्षा सहयोग पर भी सहमति बन सकती है।

भारत के साथ व्यापार समझौता करने के लिए ईयू की बेचैनी बढ़ती जा रही है, और इसकी मुख्य वजह है अमेरिका, जिसने हमेशा उनके साथ रहने का विश्वास दिलाया है। आइए जानते हैं कि यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच का संबंध कैसा था और अब वहाँ तनाव क्यों दिखाई दे रहा है।

शुरुआत में, यूरोपीय देशों और अमेरिका का संबंध ऐतिहासिक, साझा मूल्यों और रणनीतिक आवश्यकताओं पर आधारित था। हालांकि, समय-समय पर इसमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, अमेरिका ने यूरोप के पुनर्निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका ने मार्शल प्लान के तहत यूरोपीय देशों को आर्थिक सहायता दी, जिसके बाद से अमेरिका और ईयू में एकजुटता का भाव बना रहा।

यूरोपीय देश अमेरिका को सुरक्षा के दृष्टिकोण से अपना गारंटर मानते थे। नाटो के गठन के साथ, अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय देश सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर एकजुट हुए। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ यह गठबंधन यूरोप की सुरक्षा का आधार बना।

अमेरिका और यूरोप दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, अमेरिका और यूरोपीय देश अक्सर लोकतंत्र, मानवाधिकार और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करते आए हैं।

हालांकि, ट्रंप के कार्यकाल में ईयू और अमेरिका के संबंधों में तनाव देखने को मिला। ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स ईयू को अमेरिका से दूर धकेल रही है। ट्रंप ईयू को टैरिफ की धमकियों के जरिए अपनी शर्तों पर व्यापार करने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसे हालात बना दिए हैं, जिसके कारण यूरोपीय देश अपने लिए एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार की तलाश में भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

ट्रंप द्वारा बनाई गई स्थिति के चलते, दुनिया के कई देशों के लिए भारत एक उम्मीद की किरण साबित हो रहा है। इसमें केवल टैरिफ ही नहीं, ग्रीनलैंड पर कब्जे का विचार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देश ट्रंप के खिलाफ हैं, लेकिन यह भी सच है कि अमेरिका के निकलने के बाद ईयू और नाटो पूरी तरह से बदल जाएगा।

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बढ़ती साझेदारी, अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक संभावित समाधान हो सकती है। हमें यह देखने की जरूरत है कि कैसे यह नया गठबंधन वैश्विक राजनीति में बदलाव ला सकता है।
NationPress
04/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार समझौता कब हो रहा है?
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता 27 जनवरी को होने जा रहा है।
अमेरिका और यूरोपीय संघ के संबंधों में तनाव का क्या कारण है?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स और व्यापार के लिए टैरिफ की धमकियों के कारण ईयू और अमेरिका के संबंधों में तनाव आया है।
भारत को यूरोपीय देशों में क्यों देखा जा रहा है?
यूरोपीय देश भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं, खासकर अमेरिका के बदलते रुख के चलते।
Nation Press