क्या भारत को ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का प्रस्ताव नहीं स्वीकारना चाहिए?

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क्या भारत को ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का प्रस्ताव नहीं स्वीकारना चाहिए?

सारांश

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' को औपनिवेशिक सोच का हिस्सा बताया है। पार्टी ने भारत को इससे दूर रहने की अपील की है, यह कहते हुए कि यह फिलिस्तीनी अधिकारों का हनन कर रहा है। जानें इस पर पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • भारत को औपनिवेशिक सोच से दूर रहना चाहिए।
  • बोर्ड ऑफ पीस’ फिलिस्तीनी अधिकारों का हनन कर रहा है।
  • कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत से अपील की है कि वह अपनी उपनिवेशवाद विरोधी विरासत को बनाए रखे।
  • गाजा में हिंसा का सिलसिला जारी है।
  • भारत का फिलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष का समर्थन अडिग रहना चाहिए।

नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तुत ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को औपनिवेशिक सोच का हिस्सा बताकर भारत को इससे दूर रहने की सलाह दी है। पार्टी ने कहा कि यह बोर्ड फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय के अधिकार को कुचलने और अमेरिका के नेतृत्व में एक नई औपनिवेशिक व्यवस्था की स्थापना के प्रयास का हिस्सा है।

पार्टी की केंद्रीय समिति ने कहा कि शर्म अल-शेख समझौते के अंतर्गत सहमति बनी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ अब अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक चुका है। इसे अब संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें सभी शक्ति अमेरिका के हाथों में है। हाल ही में वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि इस तरह की व्यवस्था से क्या खतरा है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2025 के संघर्ष विराम के बावजूद इजराइल, अमेरिका और पश्चिमी देशों के समर्थन से गाजा में रोजाना हत्याएं, घरों और बुनियादी ढांचे का विनाश और लोगों को जानबूझकर भूखा मारने का सिलसिला जारी है। ऐसे में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन फिलिस्तीनी लोगों के संघर्ष को कमजोर करने की योजना है।

बयान में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत सरकार को आमंत्रित किया है। पार्टी ने भारत से अनुरोध किया कि वह अपनी उपनिवेशवाद विरोधी विरासत और ग्लोबल साउथ के साथ एकजुटता बनाए रखे। भारत को इस अमेरिका-केंद्रित नई औपनिवेशिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।

पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गाजा में चल रहे नरसंहार के दौरान सरकार ने देश की ऐतिहासिक विरासत को धोखा दिया है और दमनकारी ताकतों के साथ घनिष्ठ संबंध चुने हैं। यह बेहद शर्मनाक है।

कम्युनिस्ट पार्टी ने मांग की कि भारत तुरंत अपनी नीति में सुधार करे, फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता बढ़ाए और उनके कब्जे, रंगभेद और विदेशी प्रभुत्व से मुक्त होकर अपने भविष्य का निर्णय करने के अधिकार का समर्थन करे। पार्टी ने कहा कि फिलिस्तीनी मुक्ति संघर्ष के प्रति भारत का समर्थन अडिग रहना चाहिए।

Point of View

इस विषय पर विचार करते हुए, हमें यह समझना चाहिए कि भारत की स्वतंत्रता और उसकी उपनिवेशवाद विरोधी विरासत को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस तरह के प्रस्तावों से हमें सतर्क रहना चाहिए और अपनी नीति में स्पष्टता बनाए रखनी चाहिए।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
बोर्ड ऑफ पीस ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य शांति स्थापित करना बताया गया है।
कम्युनिस्ट पार्टी का क्या कहना है?
कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि यह बोर्ड औपनिवेशिक सोच का हिस्सा है और यह फिलिस्तीनी अधिकारों का हनन कर रहा है।
भारत को इस बोर्ड में शामिल होना चाहिए?
कम्युनिस्ट पार्टी ने भारत को इससे दूर रहने की सलाह दी है।
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