क्या भारत आईआईसीडीईएम 2026 की मेज़बानी करेगा, लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर वैश्विक मंथन?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत इस महीने लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईसीडीईएम 2026) की मेज़बानी करने जा रहा है। यह तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन 21 से 23 जनवरी तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा।
आईआईसीडीईएम 2026 में दुनिया भर से लगभग 90 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे, जो 42 देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इनके अलावा, 20 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भारत में स्थित विदेशी मिशनों के अधिकारी तथा चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े प्रख्यात पेशेवर भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
यह सम्मेलन भारत द्वारा लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में आयोजित किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर चुनावी चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय चुनाव मानकों तथा चुनाव प्रबंधन में नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं पर गहन विचार-विमर्श करना है।
सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण सामान्य और पूर्ण सत्र (प्लेनरी सेशंस) आयोजित किए जाएंगे। इनमें उद्घाटन सत्र, निर्वाचन प्रबंधन निकायों के लीडर्स प्लेनरी, वर्किंग ग्रुप मीटिंग्स, तथा भारतीय चुनाव आयोग के शुभारंभ जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं। इसके साथ ही, विभिन्न विषयों पर आधारित कई थीमैटिक सत्र भी होंगे, जिनमें विश्व स्तर पर चुनावों से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधानों पर चर्चा की जाएगी।
शैक्षणिक जगत की भी इस सम्मेलन में व्यापक भागीदारी देखने को मिलेगी। देश के चार आईआईटी, छह आईआईएम, 12 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी) इस मंथन का हिस्सा बनेंगे। कुल 36 थीमैटिक समूह गठित किए गए हैं, जिनका नेतृत्व राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे। इन समूहों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अकादमिक विशेषज्ञों का सहयोग प्राप्त होगा।
आईआईसीडीईएम 2026 न केवल भारत की चुनावी विशेषज्ञता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष, पारदर्शी चुनावी प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।