भारत सरकार ने 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' की शुरुआत की, सरकारी कर्मियों की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- कर्मयोगी साधना सप्ताह का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता और प्रतिबद्धता को बढ़ाना है।
- यह कार्यक्रम 2 से 8 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री ने तकनीकी और डेटा के उपयोग पर जोर दिया है।
- इस पहल में तीन मुख्य स्तंभ शामिल हैं: प्रौद्योगिकी, परंपरा और ठोस परिणाम।
- आइगोट प्लेटफार्म पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत हैं।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' नामक एक नए राष्ट्रीय शिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जो मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आता है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमताओं, प्रतिबद्धता और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को सशक्त बनाना है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शासन को बदलते आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना चाहिए, जो कि 'नागरिक देवो भव' के सिद्धांत पर आधारित है।
उन्होंने निरंतर सीखने के महत्व, निर्णय लेने में प्रौद्योगिकी और डेटा के उपयोग, और कर्तव्य-उन्मुख सार्वजनिक सेवा में बदलाव पर जोर दिया, क्योंकि भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है।
2 अप्रैल से 8 अप्रैल तक चलने वाले इस 'कर्मयोगी साधना सप्ताह' का उद्घाटन नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में किया गया। यह आयोजन 'मिशन कर्मयोगी' की पांचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है।
यह पहल विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा शिक्षण ढांचे के तहत एकत्रित करती है। कार्यक्रम का आधार तीन मुख्य स्तंभों—प्रौद्योगिकी, परंपरा, और ठोस परिणामों—पर है, जिसमें कार्यशालाएं, मास्टरक्लास और संस्थागत विचार-विमर्श शामिल हैं।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने बताया कि 'साधना सप्ताह' एक सक्षम, समर्पित और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा की ओर बढ़ने में सहायता करता है। उन्होंने बताया कि क्षमता निर्माण अब केवल नियमों पर आधारित प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि 'आइगोट' जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से एक निरंतर चलने वाला सीखने का मॉडल बन गया है।
उन्होंने शासन की भूमिका आधारित प्रणाली में परिवर्तन पर बल दिया, जिसमें योग्यता, व्यवहार और सेवा-भाव को प्राथमिकता दी जाती है। डॉ. मिश्रा ने 'क्षमता निर्माण आयोग' द्वारा इस तंत्र में एकरूपता लाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
एस. राधा चौहान ने कहा कि यह अवसर 'मिशन कर्मयोगी' की यात्रा में एक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि यह मिशन सार्वजनिक सेवा में ज्ञान, कौशल और मूल्यों का एक अद्वितीय संयोजन है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह ने पिछले पांच वर्षों में हुए मौलिक परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आइगोट प्लेटफार्म पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पंजीकृत हैं।
उद्घाटन सत्र में देश भर से वरिष्ठ अधिकारियों, मंत्रालयों, विभागों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। इसी दौरान कई महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ भी किया गया।