6 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार: मनीषा देवी हत्या मामला — एक साल बाद वायरल वीडियो से पलटी जांच, SIT गठित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार: मनीषा देवी हत्या मामला — एक साल बाद वायरल वीडियो से पलटी जांच, SIT गठित

सारांश

बिहार के पूर्वी चंपारण में एक साल पहले आत्महत्या मानकर बंद हुए मामले में वायरल वीडियो ने पूरी तस्वीर बदल दी। अब हत्या की FIR दर्ज हो चुकी है, SIT जांच में जुटी है और 5 आरोपियों की तलाश जारी है।

मुख्य बातें

मनीषा देवी की मौत 2 अक्टूबर 2025 को परसौना गांव, पूर्वी चंपारण में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी; तब मामला आत्महत्या का दर्ज किया गया था।
करीब एक वर्ष बाद कथित मारपीट का वीडियो सामने आने पर 26 सितंबर 2026 को हत्या की FIR (कांड संख्या 356-26) दर्ज की गई।
पाँच आरोपी चिह्नित — तीन प्राथमिकी और दो अप्राथमिकी अभियुक्त; सभी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी।
एसडीपीओ अरेराज के नेतृत्व में SIT गठित; न्यायालय में वारंट के लिए आवेदन।
वीडियो की प्रामाणिकता और तारीख जांचने के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) को भेजा जाएगा।
तत्कालीन थानाध्यक्ष पर लापरवाही के आरोपों की भी अलग से जांच की जा रही है।

पूर्वी चंपारण जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र में करीब एक वर्ष पहले संदिग्ध परिस्थितियों में दम तोड़ने वाली मनीषा देवी की मौत का मामला अब हत्या की जांच में तब्दील हो गया है। कथित मारपीट का एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने 26 सितंबर 2026 को हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली और पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

मूल घटनाक्रम — 2 अक्टूबर 2025

परसौना गांव निवासी मनीषा देवी, पत्नी निकेश कुमार सिंह, की 2 अक्टूबर 2025 को फांसी के फंदे से लटकी अवस्था में मौत हुई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में वीडियोग्राफी कराते हुए शव को उतारा था। उस समय मृतका के भाई सुमित कुमार सिंह ने लिखित आवेदन देकर स्पष्ट किया था कि उनकी बहन ने स्वेच्छा से फांसी लगाई है और किसी अन्य व्यक्ति का कोई दोष नहीं है। उन्होंने पोस्टमार्टम से भी इनकार किया था, जिसके आधार पर पुलिस ने सनहा दर्ज किया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

वीडियो से पलटा पूरा मामला

करीब एक वर्ष बाद मृतका के भाई सुमित कुमार सिंह को एक वीडियो मिला, जिसमें कथित तौर पर मनीषा देवी के साथ ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का दृश्य है। वीडियो देखने के बाद उन्होंने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), अरेराज के समक्ष आवेदन देकर मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया।

एसपी स्वर्ण प्रभात के अनुसार, वीडियो देखने के बाद पुलिस को प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ। इसी के आधार पर संग्रामपुर थाने में कांड संख्या 356-26 के तहत हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई।

पांच आरोपी, SIT की निगरानी में जांच

एसपी ने बताया कि अब तक पाँच व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं — तीन प्राथमिकी अभियुक्त और दो अप्राथमिकी अभियुक्त। पुलिस सभी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है और न्यायालय में वारंट के लिए भी आवेदन किया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीपीओ अरेराज के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है।

वीडियो की फॉरेंसिक जांच होगी

एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो कब का है — घटना से पहले, बाद का अथवा घटना वाले दिन का — यह स्थापित करने के लिए उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा जाएगा। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि वीडियो साक्ष्य के रूप में न्यायालय में मान्य हो सके।

तत्कालीन थानाध्यक्ष पर भी जांच

मृतका के परिजनों ने तत्कालीन थानाध्यक्ष पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। एसपी ने बताया कि इस संदर्भ में अलग से जांच की जा रही है और यदि पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की चूक सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि पोस्टमार्टम न कराया जाना इस मामले की सबसे बड़ी प्रक्रियात्मक कमज़ोरी है, जो अब अभियोजन के लिए भी चुनौती बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पुलिसिया प्रक्रिया की विफलता का आईना भी है — जब परिजन के एक लिखित बयान के आधार पर पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब वीडियो साक्ष्य और मृत शरीर — दोनों अनुपलब्ध हैं, जो अभियोजन के लिए गंभीर चुनौती है। तत्कालीन थानाध्यक्ष पर जांच की घोषणा स्वागतयोग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या FSL जांच किसी ऐसे वीडियो को न्यायालय में मान्य साक्ष्य बना पाएगी जिसकी उत्पत्ति और कस्टडी चेन अभी अस्पष्ट है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनीषा देवी मामला क्या है?
मनीषा देवी, पूर्वी चंपारण के परसौना गांव की निवासी, की 2 अक्टूबर 2025 को फांसी के फंदे से लटकी अवस्था में मौत हुई थी। उस समय परिजनों के बयान के आधार पर आत्महत्या का सनहा दर्ज किया गया था और पोस्टमार्टम नहीं कराया गया था। एक वर्ष बाद कथित मारपीट का वीडियो सामने आने पर 26 सितंबर 2026 को हत्या की FIR दर्ज की गई।
हत्या की FIR दर्ज होने में एक साल क्यों लगा?
मृतका के भाई सुमित कुमार सिंह ने घटना के समय लिखित बयान दिया था कि उनकी बहन ने आत्महत्या की है। करीब एक वर्ष बाद उन्हें एक वीडियो मिला जिसमें कथित तौर पर मनीषा के साथ ससुराल पक्ष द्वारा मारपीट का दृश्य है। इसी वीडियो के आधार पर उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और हत्या की FIR दर्ज हुई।
SIT का गठन क्यों किया गया और इसकी जिम्मेदारी क्या है?
पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ अरेराज के नेतृत्व में SIT गठित की है। SIT आरोपियों की गिरफ्तारी, साक्ष्य संकलन और FSL रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच करेगी।
वायरल वीडियो की FSL जांच क्यों जरूरी है?
वीडियो की तारीख — कि वह घटना से पहले का है, बाद का है या घटना वाले दिन का — स्थापित करना कानूनी रूप से अहम है। एसपी ने बताया कि वीडियो को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा जाएगा, ताकि यह न्यायालय में वैध साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य हो सके।
क्या इस मामले में पुलिस की लापरवाही की भी जांच होगी?
हाँ, मृतका के परिजनों ने तत्कालीन थानाध्यक्ष पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि इस संदर्भ में अलग से जांच की जा रही है और दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले