बिहार: मनीषा देवी हत्या मामला — एक साल बाद वायरल वीडियो से पलटी जांच, SIT गठित
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी चंपारण जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र में करीब एक वर्ष पहले संदिग्ध परिस्थितियों में दम तोड़ने वाली मनीषा देवी की मौत का मामला अब हत्या की जांच में तब्दील हो गया है। कथित मारपीट का एक वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने 26 सितंबर 2026 को हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली और पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वर्ण प्रभात ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
मूल घटनाक्रम — 2 अक्टूबर 2025
परसौना गांव निवासी मनीषा देवी, पत्नी निकेश कुमार सिंह, की 2 अक्टूबर 2025 को फांसी के फंदे से लटकी अवस्था में मौत हुई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में वीडियोग्राफी कराते हुए शव को उतारा था। उस समय मृतका के भाई सुमित कुमार सिंह ने लिखित आवेदन देकर स्पष्ट किया था कि उनकी बहन ने स्वेच्छा से फांसी लगाई है और किसी अन्य व्यक्ति का कोई दोष नहीं है। उन्होंने पोस्टमार्टम से भी इनकार किया था, जिसके आधार पर पुलिस ने सनहा दर्ज किया और शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वीडियो से पलटा पूरा मामला
करीब एक वर्ष बाद मृतका के भाई सुमित कुमार सिंह को एक वीडियो मिला, जिसमें कथित तौर पर मनीषा देवी के साथ ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का दृश्य है। वीडियो देखने के बाद उन्होंने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), अरेराज के समक्ष आवेदन देकर मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया।
एसपी स्वर्ण प्रभात के अनुसार, वीडियो देखने के बाद पुलिस को प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ। इसी के आधार पर संग्रामपुर थाने में कांड संख्या 356-26 के तहत हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई।
पांच आरोपी, SIT की निगरानी में जांच
एसपी ने बताया कि अब तक पाँच व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं — तीन प्राथमिकी अभियुक्त और दो अप्राथमिकी अभियुक्त। पुलिस सभी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है और न्यायालय में वारंट के लिए भी आवेदन किया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीपीओ अरेराज के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई है।
वीडियो की फॉरेंसिक जांच होगी
एसपी स्वर्ण प्रभात ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो कब का है — घटना से पहले, बाद का अथवा घटना वाले दिन का — यह स्थापित करने के लिए उसे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा जाएगा। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि वीडियो साक्ष्य के रूप में न्यायालय में मान्य हो सके।
तत्कालीन थानाध्यक्ष पर भी जांच
मृतका के परिजनों ने तत्कालीन थानाध्यक्ष पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। एसपी ने बताया कि इस संदर्भ में अलग से जांच की जा रही है और यदि पुलिस स्तर पर किसी प्रकार की चूक सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि पोस्टमार्टम न कराया जाना इस मामले की सबसे बड़ी प्रक्रियात्मक कमज़ोरी है, जो अब अभियोजन के लिए भी चुनौती बन सकती है।