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क्या बिहार में कांग्रेस का जनआंदोलन केंद्र की मनरेगा विरोधी नीति के खिलाफ सफल होगा?

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क्या बिहार में कांग्रेस का जनआंदोलन केंद्र की मनरेगा विरोधी नीति के खिलाफ सफल होगा?

सारांश

कांग्रेस पार्टी ने बिहार में केंद्र की मनरेगा विरोधी नीति के खिलाफ 'मनरेगा बचाओ संग्राम' का आह्वान किया है। क्या यह जनआंदोलन सफल होगा? जानें इस महत्वपूर्ण अभियान की पूरी जानकारी, जिसमें रणनीति और कार्यक्रम शामिल हैं।

मुख्य बातें

मनरेगा बचाओ संग्राम का आयोजन 10 जनवरी से 25 फरवरी तक होगा।
कांग्रेस पार्टी गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता फैलाएगी।
केंद्र की मनरेगा विरोधी नीति के खिलाफ व्यापक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अभियान चलाया जाएगा।

पटना, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नए विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ तथा मनरेगा की वैधानिक गारंटी की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन 'मनरेगा बचाओ संग्राम' को सफल बनाने हेतु गुरुवार को बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान की रणनीति, जिला-वार जिम्मेदारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई और उसे अंतिम रूप दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बैठक में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह नया अधिनियम मनरेगा की मूल भावना पर सीधा हमला है। यह कानून गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण जनता के रोजगार के अधिकार को कमजोर करने वाला है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों की आजीविका की वैधानिक गारंटी है, जिसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मनरेगा विरोधी नीति के खिलाफ पूरे प्रदेश में जन-जन को जागरूक करेगी और सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के माध्यम से कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव, पंचायत-पंचायत जाकर केंद्र सरकार की नीतियों की सच्चाई जनता के सामने रखेंगे।

उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के विरोध में कांग्रेस पार्टी पूरे प्रदेश में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' का व्यापक, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अभियान 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलाएगी। इस संघर्ष का उद्देश्य केंद्र सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाना, राज्यों पर डाले जा रहे आर्थिक बोझ को उजागर करना और मनरेगा को इसके मूल स्वरूप में बहाल कराना है।

राजेश राम ने कहा कि 10 जनवरी को जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ अभियान का औपचारिक शुभारंभ होगा, जबकि 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से अहिंसा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की जाएगी। इसके बाद 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, जनसंपर्क, नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण के जरिए जनता को जागरूक किया जाएगा। 30 जनवरी को वार्ड और प्रखंड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।

31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला समाहरणालय पर धरना देकर विधेयक वापसी और मनरेगा बहाली की मांग का ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके अलावा सात से 15 फरवरी के बीच राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव कर केंद्र की नीतियों का विरोध दर्ज कराया जाएगा। अंत में 16 से 25 फरवरी के दौरान एआईसीसी द्वारा आयोजित क्षेत्रीय रैलियों के साथ अभियान का समापन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सामाजिक न्याय की ओर एक कदम है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनरेगा बचाओ संग्राम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र की मनरेगा विरोधी नीति का विरोध करना और मनरेगा की वैधानिक गारंटी की रक्षा करना है।
यह आंदोलन कब से शुरू होगा?
यह आंदोलन 10 जनवरी से शुरू होगा और 25 फरवरी तक चलेगा।
कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन में क्या रणनीति अपनाएगी?
कांग्रेस पार्टी गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगी और केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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