बंगाल चुनाव 2026: पानीहाटी विधानसभा के नए समीकरण, कड़ी टक्कर की संभावनाएँ
सारांश
Key Takeaways
- पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र में 2026 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व है।
- भाजपा ने यहाँ अपनी उपस्थिति मजबूत की है।
- वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन ने अपनी स्थिति बनाए रखी है।
- मतदाता भागीदारी और शहरी मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।
- 2026 के चुनाव में मुकाबला रोचक हो सकता है।
कोलकाता, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के उत्तर २४ परगना जिले में स्थित पानीहाटी, कोलकाता महानगर क्षेत्र का एक प्रमुख उपनगरीय कस्बा है, जो तेजी से फैलते शहरी विस्तार का हिस्सा बन चुका है। सड़क और उपनगरीय रेल नेटवर्क के माध्यम से यह क्षेत्र कोलकाता से घनिष्ठता से जुड़ा हुआ है और कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के दायरे में आता है। पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र सामान्य श्रेणी की सीट है और दम दम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात सीटों में से एक है। इसमें पानीहाटी नगर पालिका के अधिकांश वार्ड शामिल हैं।
इस सीट का अस्तित्व 1967 में परिसीमन के बाद हुआ और इसने अब तक 14 विधानसभा चुनाव देखे हैं। प्रारंभिक दशकों में, यह सीट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, जिसने यहाँ आठ बार जीत हासिल की। कांग्रेस ने दो बार सफलता प्राप्त की, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की है।
बीते डेढ़ दशक में, तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व स्पष्ट रूप से बढ़ा है। 2011 से यह पार्टी लगातार तीन चुनाव जीत चुकी है। वरिष्ठ नेता निर्मल घोष इस सीट का प्रमुख चेहरा रहे हैं, जिन्होंने विभिन्न चुनावों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को बड़े और छोटे अंतर से हराकर अपनी पकड़ को मजबूत किया है। 2021 में, उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी को 25 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया।
लोकसभा चुनावों में भी पानीहाटी क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को बढ़त मिलती रही है, हालाँकि, पिछले एक दशक में भाजपा ने यहाँ अपनी मौजूदगी को मजबूत किया है और वाम दलों को मुख्य प्रतिद्वंद्वी की स्थिति से पीछे धकेल दिया है। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में मुकाबला तृणमूल और भाजपा के बीच सिमटता हुआ दिखाई दिया।
पानीहाटी में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2024 में लगभग 2.31 लाख रही। अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग पांच प्रतिशत हैं, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी भी सीमित है। पूरी तरह शहरी क्षेत्र होने के बावजूद, यहाँ मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत अच्छा रहा है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में इसमें लगातार गिरावट देखी गई है। 2011 के बाद से हर चुनाव में मतदान दर में कुछ कमी आई है, जो चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
हुगली नदी के पूर्वी तट पर बसा पानीहाटी, कभी चावल व्यापार और लघु उद्योगों के लिए जाना जाता था। समय के साथ, यहाँ कपड़ा, चमड़ा, रसायन और अन्य उद्योग विकसित हुए हैं। अब यह मुख्यतः आवासीय क्षेत्र बन चुका है, जहाँ मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवार बड़ी संख्या में निवास करते हैं। बैरकपुर ट्रंक रोड और सोदेपुर-पानीहाटी रेलवे स्टेशनों के माध्यम से यह क्षेत्र हावड़ा और सियालदह से एक घंटे से कम समय में जुड़ जाता है। पास के मेट्रो नेटवर्क ने भी इसकी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस अभी भी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आएगी। हालाँकि, वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन ने हाल के चुनावों में अपनी मौजूदगी बनाए रखी है और भाजपा का वोट प्रतिशत भी स्थिर बना हुआ है।
यदि विपक्षी वोटों का ध्रुवीकरण होता है और तृणमूल के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगती है, तो मुकाबला रोचक हो सकता है। फिलहाल पानीहाटी की राजनीति शहरी मुद्दों, संगठनात्मक मजबूती और मतदाता भागीदारी पर निर्भर करती दिख रही है। 2026 में, यह सीट एक बार फिर उत्तर २४ परगना की सियासी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।