बंगाल चुनाव 2026: भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक बदलाव और चुनौती

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बंगाल चुनाव 2026: भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक बदलाव और चुनौती

सारांश

पश्चिम बंगाल के भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में आगामी 2026 चुनाव के लिए राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। मुस्लिम बहुल मतदाता और विभिन्न दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसे और भी रोचक बनाती है। जानिए इस क्षेत्र की राजनीति और संभावनाएं।

मुख्य बातें

भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक मुकाबला हमेशा दिलचस्प रहा है।
मुस्लिम समुदाय का प्रभाव यहाँ की राजनीति को प्रभावित करता है।
तृणमूल कांग्रेस और आईएसएफ के बीच सीधी टक्कर की संभावना है।
यहाँ का मतदान प्रतिशत काफी ऊँचा है।
क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ मुख्यतः कृषि और मछली पालन पर निर्भर करती हैं।

कोलकाता, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित भांगड़ विधानसभा क्षेत्र राज्य की उन सीटों में शामिल है, जहाँ राजनीतिक संघर्ष हमेशा से दिलचस्प रहा है। यह सामान्य श्रेणी की सीट है, जिसमें भांगड़-II सामुदायिक विकास ब्लॉक पूरी तरह शामिल है, जबकि भांगड़-I ब्लॉक की जगुलगाछी, नारायणपुर और प्राणगंज ग्राम पंचायतें भी इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं। यह जादवपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में से एक है। स्थानीय स्तर पर इसे 'भंगाओरे' भी कहा जाता है।

1951 में अस्तित्व में आई इस सीट ने सभी विधानसभा चुनावों में भाग लिया है। प्रारंभिक चुनाव में यह संयुक्त सीट थी, जहाँ कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया दोनों ने जीत हासिल की थी। समय के साथ यह क्षेत्र वामपंथ का मजबूत गढ़ बन गया। विशेष रूप से 1972 से 2001 तक सीपीआई(एम) ने लगातार जीत दर्ज की।

हालांकि, 2006 में तृणमूल कांग्रेस ने मामूली अंतर से वाम दलों का सिलसिला तोड़ा। 2011 में वामपंथ ने वापसी की, लेकिन 2016 में तृणमूल ने फिर से बढ़त बना ली। 2021 के चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर हुआ, जब इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के उम्मीदवार नवाद सिद्दीकी ने वाम-कांग्रेस गठबंधन के समर्थन से तृणमूल कांग्रेस को हराया।

विधानसभा स्तर पर उतार-चढ़ाव के बावजूद लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को इस क्षेत्र में लगातार बढ़त मिलती रही है। 2019 में पार्टी को एक लाख से अधिक वोटों की बढ़त मिली थी, जबकि 2024 में यह अंतर घट गया और आईएसएफ दूसरे स्थान पर उभरी।

भांगड़ की जनसांख्यिकी इसकी राजनीति को गहराई से प्रभावित करती है। यहाँ लगभग 66 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं, जबकि अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत है। यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण है और शहरी मतदाताओं की संख्या सीमित है। मतदान प्रतिशत पर नजर डालें तो यहाँ भागीदारी काफी ऊँची रही है, जो अक्सर 85 से 89 प्रतिशत के बीच रही है। पिछले छह दशकों में यहाँ से किसी गैर-मुस्लिम उम्मीदवार की जीत नहीं हुई है।

निचले गंगा डेल्टा में स्थित भांगड़ समतल और जलसमृद्ध क्षेत्र है। विद्याधरी नदी और उसकी सहायक धाराएं यहाँ की खेती को पोषित करती हैं। धान, जूट, सब्जियां और फूलों की खेती यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। मछली पालन भी बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का साधन है। हालांकि, मानसून के दौरान जलभराव बड़ी चुनौती बन जाता है।

कोलकाता से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित यह इलाका ग्रामीण-शहरी मिश्रित चरित्र रखता है। सड़क नेटवर्क के जरिए यह कोलकाता, बरुईपुर, सोनारपुर और कैनिंग से जुड़ा है। रेल संपर्क सीधे तौर पर नहीं है, लेकिन नजदीकी स्टेशन क्षेत्र को महानगर से जोड़ते हैं।

आगामी 2026 विधानसभा चुनाव में भांगड़ में तृणमूल कांग्रेस और आईएसएफ के बीच सीधी टक्कर की संभावना है। मुस्लिम बहुल मतदाता संरचना के चलते भाजपा अब तक निर्णायक बढ़त नहीं बना पाई है, हालांकि 2021 में उसका वोट प्रतिशत उल्लेखनीय रहा। वाम-कांग्रेस गठबंधन ने इस बार रणनीतिक तौर पर आईएसएफ का समर्थन करने का संकेत दिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भांगड़ विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास क्या है?
भांगड़ विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास 1951 से शुरू होता है, जिसमें वामपंथियों ने लंबे समय तक राज किया।
भांगड़ में मतदान प्रतिशत कितना है?
भांगड़ विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत अक्सर 85 से 89 प्रतिशत के बीच रहता है।
कौन-कौन से दल भांगड़ में प्रभावी हैं?
भांगड़ में मुख्य दलों में तृणमूल कांग्रेस, आईएसएफ और वाम-कांग्रेस गठबंधन शामिल हैं।
भांगड़ की जनसांख्यिकी क्या है?
भांगड़ की जनसांख्यिकी में लगभग 66 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता और 19 प्रतिशत अनुसूचित जाति के लोग शामिल हैं।
भांगड़ विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति क्या है?
भांगड़ निचले गंगा डेल्टा में स्थित है, जो समतल और जलसमृद्ध क्षेत्र है।
राष्ट्र प्रेस
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