मुर्शिदाबाद: मतदाता सूची से नाम हटने के बावजूद तृणमूल की स्थिति मजबूत

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मुर्शिदाबाद: मतदाता सूची से नाम हटने के बावजूद तृणमूल की स्थिति मजबूत

सारांश

क्या मुर्शिदाबाद तृणमूल कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा? यहां जानिए 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल की सफलता और मतदाता सूची से नाम हटने के बावजूद उनकी स्थिति के बारे में।

Key Takeaways

  • तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में 215 सीटें जीतीं।
  • मुर्शिदाबाद में दो सीटें भाजपा के पास गईं।
  • मतदाता सूची में नाम हटने के बावजूद तृणमूल की स्थिति मजबूत है।
  • अल्पसंख्यक कल्याणकारी योजनाओं के कारण भारी बहुमत से जीत हासिल की।
  • अधीर रंजन चौधरी का क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है।

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 2011 में सत्ता में आने के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने धीरे-धीरे लेकिन निरंतर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। शुरुआत में 184 सीटें थीं, जो 2016 में बढ़कर 211 हो गईं और अंततः 2021 के विधानसभा चुनाव में 215 सीटें हासिल कीं।

मुर्शिदाबाद, जो पहले कई बार हिंसक प्रदर्शनों के लिए चर्चा में रहा है और हाल ही में मतदाता सूची से सबसे अधिक नाम हटाए जाने के लिए सुर्खियों में है, एक ऐसा उदाहरण है जहां राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद अपनी पकड़ को मजबूती से बनाए रखा।

पिछले राज्य चुनाव में तृणमूल ने जिले की 22 विधानसभा सीटों में से 15 पर जीत दर्ज की, जबकि दो सीटें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास गईं।

इन दो सीटों में से एक बहरामपुर है, जिसे कांग्रेस ने 2011 और 2016 दोनों चुनावों में जीता था, लेकिन 2021 में भाजपा ने इसे अपने कब्जे में ले लिया।

मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र में भी ऐसा ही हुआ, जहां भाजपा ने 2021 में कांग्रेस को हराया।

2011 की जनगणना के अनुसार, जिले के उप-मंडलों (सामुदायिक विकास ब्लॉकों) में बहरामपुर में मुस्लिम और हिंदू आबादी क्रमशः 53.63 प्रतिशत और 45.94 प्रतिशत थी।

मुर्शिदाबाद-जियागंज में यह आंकड़ा क्रमशः 54.52 प्रतिशत और 44.61 प्रतिशत था। लेकिन अधिकांश अन्य उप-मंडलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत कहीं अधिक है।

तृणमूल सरकार के अल्पसंख्यक समर्थक रुख और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के कारण मुर्शिदाबाद की दो सीटों को छोड़कर बाकी सभी विधानसभा सीटों पर सरकार ने भारी बहुमत से जीत प्राप्त की।

2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की तत्कालीन जनसंख्या 71,03,807 में हिंदू 33.21 प्रतिशत, मुस्लिम 66.27 प्रतिशत, ईसाई 0.25 प्रतिशत और अन्य शामिल थे।

मुस्लिम मुख्यतः बांग्लादेश सीमा से लगे पद्मा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में बसे हुए थे, जबकि हिंदू शहरी क्षेत्रों में अधिक संख्या में थे।

वहीं दूसरी ओर, 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने भगवंगोला, नबग्राम, डोमकल और जलांगी सीटों पर पहली बार जीत हासिल की और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के मौजूदा विधायकों को हराया।

अन्य विधानसभा क्षेत्रों, जैसे फरक्का, सुती, लालगोला, रानीनगर, खारग्राम, बुरवान, कांडी, भरतपुर, रेजीनगर, बेलडांगा और नोवदा में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी कांग्रेस के मौजूदा विधायकों को हराने में सफल रही।

1977 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे से हारने और उसके बाद उसके प्रभाव में कमी आने के बावजूद, अधीर रंजन चौधरी की बदौलत कांग्रेस का जिले में काफी दबदबा बना रहा।

लोकसभा में कांग्रेस के पूर्व नेता (2019-2024) को उनकी परोपकारिता और सामाजिक कार्यों के लिए सराहा गया, जिसके कारण उन्हें 'मुर्शिदाबाद का रॉबिन हुड' और 'मुर्शिदाबाद का नवाब' जैसे उपनाम मिले।

Point of View

यह देखना दिलचस्प है कि कैसे मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस ने अपनी स्थिति को बनाए रखा है, जबकि मतदाता सूची में नामों की कमी हो रही है। इस स्थिति का प्रभाव आगामी चुनावों में स्पष्ट होगा।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस ने कितनी सीटें जीती थीं?
तृणमूल कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद में 22 विधानसभा सीटों में से 15 सीटें जीती थीं।
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कौन सी सीटें जीती थीं?
भाजपा ने बहरामपुर और मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र की सीटें जीती थीं।
मुर्शिदाबाद में मुस्लिम और हिंदू आबादी के प्रतिशत क्या हैं?
बहरामपुर में मुस्लिम आबादी 53.63%25 और हिंदू आबादी 45.94%25 थी।
तृणमूल कांग्रेस की जीत का मुख्य कारण क्या था?
तृणमूल सरकार के अल्पसंख्यक समर्थक रुख और लक्षित कल्याणकारी योजनाएं इसकी जीत का मुख्य कारण थीं।
अधीर रंजन चौधरी को किस नाम से जाना जाता है?
उन्हें 'मुर्शिदाबाद का रॉबिन हुड' और 'मुर्शिदाबाद का नवाब' जैसे उपनाम मिले हैं।
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