बिहार सरकार की जाली नोटों पर सख्ती, बैंक शाखाओं में 'नोट सॉर्टिंग मशीन' अनिवार्य
सारांश
Key Takeaways
- जाली नोटों की रोकथाम
- नोट सॉर्टिंग मशीन का अनिवार्य प्रयोग
- सहकारी बैंकों में पारदर्शिता
- आर्थिक अपराध की निगरानी
- डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म
पटना, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने जाली नोटों के अवैध कारोबार को समाप्त करने के लिए एक ठोस कदम उठाया है। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भारत-नेपाल सीमा से सटे बैंकों में 'नोट सॉर्टिंग मशीन' लगाने का आदेश दिया है, ताकि जाली नोटों के प्रवाह को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में निगरानी को बढ़ाने और आम लोगों की सुविधा के लिए और अधिक 'करेंसी एक्सचेंज' केंद्र स्थापित करने की भी सलाह दी। बुधवार को आयोजित '40वीं राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक' में उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारी बैंकों में पारदर्शिता और सुधार लाने के लिए समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जानी चाहिए।
इस बैठक में 'बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स' एक्ट 2019 और 'बिहार प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट्स ऑफ डिपॉजिटर्स' एक्ट 2002 के कार्यान्वयन की भी समीक्षा की गई। आर्थिक अपराध इकाई को दोषी संस्थाओं के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद ने बताया कि अब बैंकों से की जाने वाली वास्तविक कॉल '1600' से शुरू होने वाले नंबरों से की जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट के लिंक के अंत में 'आई एन (इन)' होना जरूरी है, ताकि लोग असली और नकली वेबसाइट के बीच अंतर कर सकें।
उन्होंने कहा कि वित्त विभाग और आरबीआई द्वारा सोशल मीडिया, रेडियो जिंगल्स (मैथिली और भोजपुरी) और समाचार पत्रों के माध्यम से धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
आरबीआई ने 'डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म' के बारे में जानकारी दी, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से धोखाधड़ी का पता लगाने और संदिग्ध संस्थाओं को चिह्नित करने की क्षमता रखता है। बैठक में वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर और विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।