बिहार विधानसभा में मिठाइयों पर चर्चा: जीआई टैग की आवश्यकता पर जोर

Click to start listening
बिहार विधानसभा में मिठाइयों पर चर्चा: जीआई टैग की आवश्यकता पर जोर

सारांश

बिहार विधानसभा में सोमवार को विभिन्न मिठाइयों, जैसे लड्डू, तिलकुट और खोभिया लाई पर चर्चा हुई। विधायकों ने उनकी जीआई टैग की मांग की, जिससे सदन का माहौल खुशनुमा बना।

Key Takeaways

  • बिहार की मिठाइयाँ: लड्डू, तिलकुट, खोभिया लाई पर चर्चा।
  • जीआई टैग: सांस्कृतिक पहचान के लिए आवश्यक।
  • विधायकों का समर्थन: स्थानीय उत्पादों के लिए एकजुटता।
  • उद्योग मंत्री का बयान: जीआई टैग की प्रक्रिया औपचारिक।
  • उपमुख्यमंत्री की टिप्पणी: बड़हिया के रसगुल्ले को भी मान्यता मिलनी चाहिए।

पटना, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा में सोमवार को राज्य की प्रसिद्ध मिठाइयों पर चर्चा हुई। कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्र के प्रसिद्ध लड्डू का उल्लेख किया, जबकि अन्य ने रस्कदम, अनारसा, और तिलकुट की बात की। इस दौरान सदन का माहौल भी खुशनुमा बना रहा।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, राज्य की मशहूर मिठाइयों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिलाने की मांग उठी। भाजपा विधायक सियाराम सिंह ने अपने क्षेत्र की विशेष खोभिया लाई को जीआई टैग दिलाने का मुद्दा उठाया।

बाढ़ के विधायक ने कहा कि बाढ़ की खोभिया लाई सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने उल्लेख किया कि जैसे कई पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग के माध्यम से पहचान मिली है, वैसे ही बाढ़ की लाई को भी संरक्षण और ब्रांड वैल्यू मिलनी चाहिए।

इस पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि जीआई टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया कानूनी और औपचारिक होती है, जिसके लिए विस्तृत दस्तावेज, ऐतिहासिक प्रमाण और तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि बिहार के कई उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है और आगे की जरूरतों के अनुसार यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि बाढ़ की लाई को जीआई टैग दिया जा रहा है, तो बड़हिया के रसगुल्ले को भी यह मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने मजाक में कहा, "दोनों मिठाइयां मंत्री दिलीप जायसवाल खाते हैं, लेकिन इसके जीआई टैग के लिए प्रयास नहीं करते।" इस पर सदन में हंसी का माहौल बन गया।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने भी गयाजी के तिलकुट को जीआई टैग दिलाने की आवश्यकता बताई। मनेर के विधायक भाई बीरेंद्र ने मनेर के प्रसिद्ध लड्डू के लिए जीआई टैग की मांग की।

Point of View

सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का प्रयास है। विधायकों का यह कदम न केवल स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाएगा, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करेगा।
NationPress
23/02/2026

Frequently Asked Questions

जीआई टैग क्या है?
जीआई टैग (भौगोलिक संकेतक टैग) एक विशेष प्रकार का लेबल होता है जो किसी विशेष क्षेत्र के उद्यमों या उत्पादों को पहचानता है।
बिहार की कौन सी मिठाइयाँ जीआई टैग के लिए चर्चा में हैं?
बिहार विधानसभा में लड्डू, तिलकुट और खोभिया लाई जैसी मिठाइयों को जीआई टैग के लिए चर्चा में लाया गया।
जीआई टैग का लाभ क्या है?
जीआई टैग मिलने से उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, जिससे उसकी ब्रांड वैल्यू बढ़ती है।
क्या जीआई टैग पाने की प्रक्रिया कठिन है?
जीआई टैग प्राप्त करने के लिए कानूनी दस्तावेज, ऐतिहासिक प्रमाण और तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता होती है।
बिहार विधानसभा में इस चर्चा का महत्व क्या है?
यह चर्चा स्थानीय उत्पादों की पहचान और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
Nation Press