इंग्लैंड की बिर्कबेक यूनिवर्सिटी भारत में खोलेगी अपना कैंपस, मिली यूजीसी की मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- बिर्कबेक यूनिवर्सिटी का भारत में कैंपस खोलना एक महत्वपूर्ण कदम है।
- छात्रों को विदेश जाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता कम होगी।
- यह कदम भारत को एक ग्लोबल एजुकेशन हब में बदलने की दिशा में है।
- 60 प्रतिशत कम खर्च पर विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी।
- यह भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार है।
नई दिल्ली, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इंग्लैंड की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अब भारत में अपना कैंपस स्थापित करने जा रही है। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जो देश में विदेशी विश्वविद्यालयों का अनुभव प्रदान करेगा।
लंदन की बिर्कबेक, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन को भारत में अपना कैंपस खोलने की अनुमति दी गई है। यह लगभग 200 साल पुराना विश्वविद्यालय अब ऐसे कोर्सबिजनेस मैनेजमेंट और डेटा एनालिटिक्स जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि छात्रों को अब विदेश जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी, क्योंकि वे स्वदेश में ही उच्च गुणवत्ता की पढ़ाई प्राप्त कर सकेंगे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी ने मंगलवार को बिर्कबेक, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन को बेंगलुरु में अपना कैंपस खोलने का इरादा पत्र सौंपा। यह पत्र विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रोफेसर सैली व्हीलर को दिया गया। इस अवसर पर भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन, ब्रिटिश काउंसिल की भारत निदेशक एलिसन बैरेट और कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
यह ध्यान देने योग्य है कि यह 15वां अवसर है जब किसी विदेशी विश्वविद्यालय को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति मिली है। सरकार का उद्देश्य भारत को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र में बदलना है। भारतीय कैंपस में विश्वस्तरीय शिक्षा विदेशी विश्वविद्यालयों की तुलना में 60 प्रतिशत कम लागत पर उपलब्ध होगी। बिर्कबेक विश्वविद्यालय का यह बेंगलुरु में खुलने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस है। यह कदम भारत सरकार की योजना के अनुरूप है, जो 2030 तक उच्च शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत को स्थापित करना चाहती है।
यूजीसी के चेयरमैन और उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि यह लेटर ऑफ इंटेंट भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक शिक्षा का द्वार खोलने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। अब छात्र बेंगलुरु में ही लंदन जैसी विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे, वह भी विदेश जाकर पढ़ाई करने की लागत से करीब 60 प्रतिशत कम। उन्होंने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देती है। यूजीसी के नए प्रगतिशील नियमों के कारण अब दुनिया के बेहतरीन विश्वविद्यालय भारत में अपना कैंपस स्थापित कर रहे हैं। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होगी, बल्कि छात्रों को कम लागत में बेहतर अवसर भी मिलेंगे।
डॉ. विनीत जोशी ने यह भी कहा कि यूजीसी का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। बिर्कबेक जैसी प्राचीन और प्रतिष्ठित ब्रिटिश यूनिवर्सिटी का भारत आना भारत-यूके के बीच शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। यह पहल केवल छात्रों के लिए नए अवसर उत्पन्न नहीं करेगी, बल्कि अनुसंधान सहयोग को भी मजबूत करते हुए भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बनाएगी। यह कदम 2030 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक होगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि 1823 में स्थापित बिर्कबेक यूनिवर्सिटी अपने करियर-केंद्रित शिक्षा मॉडल के कारण वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेंगलुरु कैंपस में छात्रों को रिसर्च-आधारित शिक्षण और उद्योग-एकीकृत पाठ्यक्रम मिलेगा। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सैली व्हीलर ने इस अवसर पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि वह भारत की शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनकर खुश हैं और उनका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना है।