14 अप्रैल को बिहार में मुख्यमंत्री चुनाव के लिए जाएंगे शिवराज सिंह चौहान, भाजपा ने दी जिम्मेदारी
सारांश
Key Takeaways
- शिवराज सिंह चौहान को बिहार के सीएम चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
- वे 14 अप्रैल को बिहार जाने वाले हैं।
- भाजपा को मुख्यमंत्री के नाम की अनुशंसा करनी है।
- नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है।
- बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।
रायसेन/पटना, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में अगला मुख्यमंत्री किसे बनाया जाएगा? इस चयन के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय पर्यवेक्षक की नियुक्ति की है। पार्टी ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी है।
केंद्रीय पर्यवेक्षक बनने के बाद, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं केवल पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता हूं और मुझे जो भी कार्य सौंपा जाता है, उसे ईमानदारी और प्रमाणिकता के साथ निभाना मेरा कर्तव्य है। मुझे जो भी दायित्व दिया जाता है, मैं उसे पूरा करने का प्रयास करता हूं। मैं 14 अप्रैल को बिहार जाऊंगा।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी दी कि भाजपा के संसदीय बोर्ड ने बिहार में पार्टी विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
वहीं, बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी, जो नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं, ने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को मुख्यमंत्री के नाम की अनुशंसा करनी है और गेंद अब भाजपा के पाले में है। इसके बाद एनडीए विधायकों की बैठक होगी, जिसमें एनडीए का विधायक दल अपना नेता चुनेगा।
आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभाला और हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। नई दिल्ली में उन्हें राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शपथ दिलाई।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कांग्रेस के नेता जयराम रमेश, और जेडीयू व भाजपा के अन्य नेता मौजूद थे। नीतीश कुमार के इस शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार की सियासत में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है।
नीतीश कुमार पहले राज्य विधान परिषद के सदस्य थे, लेकिन राज्यसभा के लिए चुनाव जीतने के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
नीतीश कुमार मार्च में संसद के उच्च सदन के लिए बिहार से निर्वाचित हुए थे। वह लगभग दो दशक तक बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं और जनता दल यूनाइटेड के मुखिया भी हैं।