भाजपा का उद्देश्य: भारत को सशक्त और समृद्ध बनाना है, हेमंत खंडेलवाल का बयान
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा का लक्ष्य केवल सत्ता नहीं, बल्कि एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करना है।
- भाजपा की स्थायी विचारधारा उसे अन्य राजनीतिक दलों से अलग करती है।
- प्रशिक्षण से न केवल व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि संगठन की एकजुटता भी बढ़ती है।
भोपाल, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि भाजपा ने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया है, और यही हमें अडिग बनाता है। भाजपा का प्रमुख लक्ष्य सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करना है।
खंडेलवाल ने मंगलवार को रायसेन और विदिशा जिलों में आयोजित मंडल प्रशिक्षण वर्ग, जिला पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि बैठक और छोटी टोली बैठक के दौरान यह बात कही।
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा और मिशन है, जो देश के हर नागरिक की प्रगति और समृद्धि के लिए कार्यरत है। भाजपा का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि हर समाज वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करना है, ताकि हम एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बना सकें। हमारी विचारधारा और संगठनात्मक शक्ति के कारण आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है।
खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। यही हमारी ताकत है, और यही हमें एक सशक्त राष्ट्र बनाने में सहायता करेगा। भाजपा के कार्यकर्ता ही पार्टी का असली चेहरा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की स्थायी, स्पष्ट और सशक्त विचारधारा ही वह तत्व है जो हमें अन्य राजनीतिक दलों से अलग करती है। यह विचारधारा हमें समाज के हर वर्ग के उत्थान में सच्चे रूप से कार्य करने की प्रेरणा देती है। यही हमें अडिग बनाती है, चाहे चुनाव परिणाम किसी भी दिशा में जाएं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल व्यक्तिगत कौशल को बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संगठन को भी एकजुटता प्रदान करता है। जब हम एक साथ अपने विचारों और सिद्धांतों पर प्रशिक्षण लेते हैं, तो हम अपनी कार्यप्रणाली में और अधिक दक्षता प्राप्त करते हैं।
खंडेलवाल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वर्ष 1952 में जनसंघ के गठन से लेकर आज तक भाजपा की विचारधारा में कोई भी परिवर्तन नहीं आया है। अयोध्या