क्या सीबीआई ने सीपीआरआई के अधिकारी को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है?
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई ने 9.5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए अधिकारी को गिरफ्तार किया।
- बरामद की गई संपत्ति की कुल कीमत 3.76 करोड़ रुपए है।
- भ्रष्टाचार के नेटवर्क की जांच जारी है।
- सीपीआरआई का काम विद्युत उपकरणों की जांच करना है।
- सीबीआई की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश मिला है।
बेंगलुरु, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 9.5 लाख रुपए की रिश्वत से जुड़े एक मामले में केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), बेंगलुरु के संयुक्त निदेशक को गिरफ्तार किया है। यह जानकारी सीबीआई ने शुक्रवार को साझा की।
सीबीआई ने 8 जनवरी को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें सीपीआरआई के वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों पर मिलीभगत से भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा है। सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने एक निजी कंपनी एम/एस सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनीज द्वारा बनाए गए बिजली से जुड़े उपकरणों के लिए अनुकूल परीक्षण रिपोर्ट जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और 9 जनवरी को बेंगलुरु में संयुक्त निदेशक को निजी कंपनी के एक अधिकारी के साथ 9.5 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया।
इसके बाद सरकारी अधिकारी के घर पर की गई तलाशी में बड़ी मात्रा में कथित अवैध संपत्ति बरामद हुई। सीबीआई ने 3.59 करोड़ रुपए नकद जब्त किए। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर, हांगकांग डॉलर, सिंगापुर डॉलर, इंडोनेशियाई रुपिया, मलेशियाई रिंगिट, यूरो, चीनी युआन, स्वीडिश क्रोना और यूएई दिरहम जैसी विदेशी मुद्राएं भी मिलीं, जिनकी कीमत करीब 4.05 लाख रुपए बताई गई है।
कैश और विदेशी मुद्रा के अलावा तलाशी के दौरान आभूषण और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। अब तक कुल मिलाकर विदेशी मुद्रा सहित करीब 3.76 करोड़ रुपए की बरामदगी हो चुकी है।
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान अभी जारी है और आगे और भी बरामदगी हो सकती है। मामले में भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संस्थान है, जो देशभर में उपयोग होने वाले विद्युत उपकरणों की जांच और प्रमाणन का कार्य करता है।