5 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या छत्तीसगढ़ की झांकी गणतंत्र दिवस पर भारत के पहले आदिवासी डिजिटल म्यूजियम की झलक दिखाएगी?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या छत्तीसगढ़ की झांकी गणतंत्र दिवस पर भारत के पहले आदिवासी डिजिटल म्यूजियम की झलक दिखाएगी?

सारांश

गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी में भारतीय आदिवासी वीरों की अद्वितीय कहानी प्रस्तुत की जाएगी। यह झांकी दर्शकों को डिजिटल म्यूजियम के माध्यम से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएं सुनाएगी, जो आत्म-समर्पण और साहस का प्रतीक हैं।

मुख्य बातें

गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी महत्वपूर्ण है।
डिजिटल म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया।
आदिवासी वीरों का सम्मान झांकी में किया जाएगा।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ की झांकी गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए तैयार है। यह भारत के पहले डिजिटल म्यूजियम पर आधारित है, जो आदिवासी वीर नेताओं के समर्पण को दर्शाती है।

‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ थीम वाली यह झांकी गुरुवार को रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मीडिया के सामने आरआर कैंप में प्रेस पूर्वावलोकन के दौरान प्रस्तुत की गई।

छत्तीसगढ़ की यह झांकी उन अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि देती है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों का साहसपूर्वक विरोध किया और स्वतंत्रता के लिए अपनी जान की आहुति दी।

इन शहीदों की स्मृति में, देश का पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित किया गया है, जहां 14 प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता संघर्षों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से सुरक्षित किया गया है। इस म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

विशेषज्ञ समिति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक संबंध विभाग के अधिकारी और कलाकार पिछले एक महीने से काम कर रहे हैं, ताकि झांकी को अंतिम रूप दिया जा सके। इस वर्ष 17 राज्य झांकियों को कर्तव्य पथ पर परेड में भाग लेने का गौरव प्राप्त हुआ है।

इसमें 1910 के भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया है। धरवा समुदाय के वीर गुंडाधुर ने अन्याय के खिलाफ समाज को एकजुट किया। आम की टहनियां और सूखी मिर्च, जो भूमकाल विद्रोह के प्रतीक थे, इन्हें झांकी में दिखाया गया है। विद्रोह की ताकत को इस बात से समझा जा सकता है कि ब्रिटिशों को नागपुर से सैनिक बुलाने पड़े थे, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं पाए।

झांकी में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर तलवार हाथ में लिए दर्शाया गया है। उन्होंने अकाल के दौरान गरीबों के कल्याण के लिए लड़ाई लड़ी और 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह झांकी आदिवासी समुदाय के अडिग साहस, देशभक्ति, और स्वतंत्रता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हम न केवल छत्तीसगढ़ के अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत को समझते हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि कैसे आदिवासी सामुदायों ने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया। यह न केवल एक समारोह है, बल्कि हमारे इतिहास की महत्वपूर्ण गाथाओं को जीवित रखने का एक प्रयास है।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी में क्या दिखाया जाएगा?
इस झांकी में भारत के पहले आदिवासी डिजिटल म्यूजियम की झलक, आदिवासी वीरों का सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख संघर्षों को दर्शाया जाएगा।
डिजिटल म्यूजियम का उद्घाटन कब हुआ था?
डिजिटल म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर किया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले