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भाजपा चुनाव आते ही धर्म-जाति की राजनीति करती है: सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर का नितिन नवीन पर पलटवार

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भाजपा चुनाव आते ही धर्म-जाति की राजनीति करती है: सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर का नितिन नवीन पर पलटवार

सारांश

चुनावी माहौल गर्म होने के साथ सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन पर सीधा हमला बोला — धर्म-जाति की राजनीति, पिछड़े-दलित युवाओं के रोज़गार संकट और NCRB के अपराध आंकड़ों को हथियार बनाकर। जौनपुर से उठी यह आवाज़ उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक जंग का पूर्वाभास है।

मुख्य बातें

रागिनी सोनकर (सपा विधायक) ने 7 नवंबर 2026 को जौनपुर में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन पर पलटवार किया।
आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव नज़दीक आते ही धर्म और जाति की राजनीति पर उतर आती है।
पिछड़े और दलित युवाओं को सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं के इंतज़ार में उम्र गँवानी पड़ रही है — सोनकर का आरोप।
NCRB के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर भाजपा सरकार को घेरा।
सपा ने खुद को धर्मनिरपेक्ष और सनातन भावना दोनों का पक्षधर बताते हुए हर धर्म-जाति-जेंडर को सम्मान देने की बात कही।

समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने 7 नवंबर 2026 को जौनपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा को आम जनता की कोई चिंता नहीं है और वह केवल चुनाव नज़दीक आने पर धर्म व जाति की राजनीति पर उतर आती है। उनके अनुसार, भाजपा पिछड़े और दलित वर्गों के अधिकार लगातार छीन रही है और युवाओं को धर्म के नाम पर बरगला रही है।

मुख्य आरोप और बयान

डॉ. सोनकर ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी कहीं से भी जनता की चिंता करती हुई दिखाई नहीं दे रही है और शायद इसीलिए बार-बार अपने बयानों में खुद भारतीय जनता पार्टी फंस जाती है। वे अपने परिवार की चिंता करते हैं, जनता की उन्हें बिल्कुल चिंता नहीं है।' उन्होंने भाजपा पर सीधे आरोप लगाया कि उसका एजेंडा हमेशा यही रहा है कि किस तरह धर्म के नाम पर राजनीति की जाए, युवाओं के हाथों से किताबें छीनकर झंडे थमाए जाएं और उन्हें आपस में लड़वाया जाए।

युवाओं और रोज़गार पर सपा विधायक की चिंता

विधायक ने रोज़गार संकट को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलित और सामान्य वर्ग के युवा परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों का इंतज़ार करते-करते उम्र गँवा रहे हैं। उनके अनुसार, नौकरियाँ लगातार समाप्त हो रही हैं और भर्ती प्रक्रियाएँ ठप पड़ी हैं, जिसकी सबसे अधिक मार पिछड़े और दलित समाज के युवाओं पर पड़ रही है।

चुनावी ध्रुवीकरण पर आरोप

डॉ. सोनकर ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आएंगे, भाजपा के बयान केवल धर्म और जातियों के विभाजन पर केंद्रित होते जाएंगे। उनका आरोप है कि इस तरह के बयानों से देश की सेक्युलर और लोकतांत्रिक व्यवस्था को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर सभी प्रमुख दलों की राजनीतिक सक्रियता तेज़ हो गई है।

अपराध और महिला सुरक्षा पर भाजपा सरकार पर निशाना

सपा विधायक ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा सरकार में अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े स्वयं सरकार द्वारा जारी किए गए हैं, किसी विपक्षी दल के नहीं। उनके अनुसार, महिलाओं के प्रति अपराध विशेष रूप से त्योहारों के समय बढ़ रहे हैं और आबकारी राजस्व पर निर्भर सरकार की नीतियाँ इस समस्या को और गहरा कर रही हैं।

धर्मनिरपेक्षता और सनातन भावना पर सपा का रुख

डॉ. सोनकर ने समाजवादी पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि सपा हर धर्म, हर जाति और हर जेंडर को सम्मान देती है। उन्होंने कहा कि असली सनातनी वही है जो हर धर्म का सम्मान करना जानता है, न कि किसी टोपी पर टिप्पणी करता है। गौरतलब है कि यह बयान हाल ही में हुई उस विवादित घटना की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें, उनके अनुसार, सनातन भावना को आहत करने का आरोप लगा और जिसके बाद भाजपा का राजनीतिक ग्राफ प्रभावित हुआ। आने वाले दिनों में सपा और भाजपा के बीच यह राजनीतिक तकरार और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विपक्ष के लिए असामान्य रूप से तथ्य-आधारित रणनीति है। लेकिन विडंबना यह है कि स्वयं सपा का इतिहास भी जाति-आधारित गोलबंदी से मुक्त नहीं रहा। असली सवाल यह है कि क्या पार्टी रोज़गार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को टिकाऊ चुनावी एजेंडा बना पाएगी, या यह भी अंततः जाति-धर्म की पटरी पर लौट आएगा। 'सनातनी भी हैं' वाला बयान स्पष्ट संकेत देता है कि सपा भाजपा के हिंदुत्व-आधारित आख्यान को काटने के लिए नया वैचारिक संतुलन खोज रही है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
डॉ. रागिनी सोनकर ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव नज़दीक आते ही धर्म और जाति की राजनीति करती है, पिछड़े-दलित युवाओं के अधिकार छीनती है और युवाओं को बरगलाकर उनके हाथों से किताबें छीन झंडे थमाती है। उन्होंने NCRB के सरकारी आंकड़ों के हवाले से महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों का भी ज़िक्र किया।
नितिन नवीन कौन हैं और उनसे यह विवाद क्यों उठा?
नितिन नवीन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने उनके हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए उन पर जनहित की जगह पार्टी-हित को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
सपा विधायक ने रोज़गार के मुद्दे पर क्या कहा?
डॉ. सोनकर ने कहा कि पिछड़े, दलित और सामान्य वर्ग के युवा सरकारी परीक्षाओं और भर्तियों का लंबे समय से इंतज़ार कर रहे हैं और उम्र निकलती जा रही है। उनके अनुसार, भाजपा सरकार में नौकरियाँ लगातार समाप्त हुई हैं और भर्ती प्रक्रियाएँ ठप हैं।
NCRB के आंकड़ों का सपा विधायक ने क्यों हवाला दिया?
डॉ. सोनकर ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ने के जो आंकड़े वे उद्धृत कर रही हैं, वे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हैं जो स्वयं केंद्र सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। इससे वे भाजपा के 'कानून-व्यवस्था' के दावे को सरकारी स्रोत से ही खंडित करने की कोशिश कर रही थीं।
सपा ने धर्म और सनातन भावना पर अपना रुख क्या बताया?
डॉ. सोनकर ने कहा कि समाजवादी पार्टी भारत की धर्मनिरपेक्षता के साथ जुड़ते हुए हर धर्म, हर जाति और हर जेंडर को सम्मान देती है। उन्होंने कहा कि सपा के लोग स्वयं सनातनी हैं और असली सनातनी वही है जो हर धर्म का सम्मान करे, न कि किसी की टोपी पर टिप्पणी करे।
राष्ट्र प्रेस
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